सार
होर्मुज जलसंधि पर जारी संघर्ष ने तेल सप्लाई को गंभीर संकट में डाल दिया है। पहले यहां मासिक 3000 से अधिक टैंकर गुजरते थे, लेकिन अब मुट्ठीभर टैंकरों की ही आवाजाही हो रही है। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर प्रतिदिन करोड़ों बैरल के स्तर तक खतरा मंडरा रहा है।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच दुनिया की ऊर्जा लाइफलाइन माने जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही ठहर सी गई है। जहां सामान्य समय में हर महीने करीब 3,000 जहाज इस मार्ग से गुजरते थे, वहीं युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक केवल 21 टैंकर ही इस रास्ते से निकल पाए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो वैश्विक तेल आपूर्ति में प्रतिदिन एक करोडू बैरल तक की कमी आ सकती है। हॉर्मुज स्ट्रेट अब युद्ध का केंद्र बन गया है। 1 से 15 मार्च के बीच चीन से जुड़े 11 जहाजों ने इस मार्ग का इस्तेमाल किया, जबकि भारत ने 14 मार्च को बताया कि उसके झंडे वाले दो एलपीजी टैंकर सुरक्षित रूप से इस रास्ते से गुजर चुके हैं।
ये भी पढ़ें:- ईरान युद्ध का असर: बोतलबंद पानी पीना महंगा, 11 फीसदी तक बढ़ी कीमत; प्लास्टिक लागत बढ़ने से कंपनियों पर दबाव
कीमतों में उछाल और एशिया पर सबसे बड़ा असर
हॉर्मुज में संकट का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। रॉयटर्स के अनुसार कच्चे तेल की कीमतें करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो इस साल लगभग 70% और पिछले साल के मुकाबले करीब 50% अधिक हैं। इस संकट का सबसे बड़ा असर एशियाई देशों पर पड़ने की आशंका है। चीन अकेले ईरान के निर्यातित तेल का लगभग 90% खरीदता है और उसी तेल से तैयार उत्पाद दुनिया भर में निर्यात करता है। ऐसे में ऊर्जा कीमतों में वृद्धि का असर वैश्विक महंगाई पर भी पड़ सकता है। भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी इस मार्ग पर काफी निर्भर हैं। ईरान के साथ बातचीत के जरिए स्थिति सामान्य करने की कोशिशें जारी हैं।
पश्चिम-एशिया में फिलहाल अमेरिकी सैनिकों की तैनाती नहीं : ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती नहीं कर रहे हैं। ईरान के साथ जारी तनाव के बीच ट्रंप ने कहा कि यदि सैनिक भेजने का फैसला होता भी है तो वह इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं करते। फिलहाल अभी कहीं भी सैनिक भेजने की कोई योजना नहीं है। ट्रंप ने यह बयान व्हाइट हाउस में जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के साथ बैठक के दौरान दिया। उन्होंने कहा, मैं कहीं भी सैनिक नहीं भेज रहा हूं। अगर भेजता भी, तो आपको नहीं बताता। लेकिन अभी सैनिक नहीं भेजे जा रहे हैं। हम वहीं करेंगे, जो जरूरी होगा।
ये भी पढ़ें:- अब तेल-गैस प्रतिष्ठानों पर थमेंगे हमले?: ट्रंप की सलाह पर नेतन्याहू बोले- साउथ पार्स पर अब और हमले नहीं होंगे
ईरान की रणनीतिक बढ़त व नियंत्रण
गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र के नियमों के तहत तटीय देशों को 12 नॉटिकल मील तक समुद्री क्षेत्र पर नियंत्रण का अधिकार होता है। हॉर्मुज का सबसे संकरा हिस्सा ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जल में आता है, जिससे ईरान को सामरिक बढ़त मिलती है। विशेषज्ञों के अनुसार ईरान समुद्री माइंस बिछाने, तेज गति वाली नौकाओ और एंटी-शिप मिसाइलों से लैस फास्ट अटैक बोट्स के जरिए इस मार्ग को बाधित करने की क्षमता रखता है।