हांगकांग में लोकतंत्र की मांग को लेकर सालभर से चल रहे प्रदर्शन अब भी थमे नहीं हैं। 2019 में इस खबर ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जगह बनाई। इन्हें कुचलने के लिए चीन ने अपनी सेना भी तैनात कर दी। पिछले 6 महीने से जारी प्रदर्शन के खिलाफ पहली बार पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिक सड़कों पर दिखे। विरोध प्रदर्शन की असली वजह थी चीनी प्रत्यर्पण बिल। इसे लेकर आंदोलन ने इस कदर जोर पकड़ा कि जनता सड़कों पर उतर आई।
4 सितंबर को चीन ने इस बिल को वापस ले लिया। इस कानून में प्रावधान था कि अगर कोई व्यक्ति अपराध करके हांगकांग आ जाता है तो उसे जांच प्रक्रिया में शामिल होने के लिए चीन भेजा जा सकता है। हांगकांग की सरकार कानून में संशोधन के लिए फरवरी 2019 में प्रस्ताव लाई थी। कानून में संशोधन का प्रस्ताव एक घटना के बाद लाया गया था जिसमें एक व्यक्ति ने ताइवान में अपनी प्रेमिका की कथित तौर पर हत्या कर दी थी और हांगकांग वापस आ गया था।
हांगकांग पुलिस ने नए साल पर सरकार विरोधी मार्च के दौरान अवैध हथियार रखने के आरोप में 400 लोगों को गिरफ्तार किया है। आयोजकों का दावा है कि इस विरोध में पुलिस अनुमति के बिना एक लाख से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। बता दें कि नए साल पर यहां आजादी का जश्न मनाने के बजाय लोकतंत्र समर्थकों ने सड़कों पर प्रदर्शन किए जिसमें उनकी पुलिस के साथ झड़पें भी हुईं।
बता दें कि जून से शुरू हुए इन प्रदर्शनों में पुलिस ने अब तक कुल 7,000 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। बहरहाल बुधवार को हुए प्रदर्शन में दावा है कि पुलिस ने नागरिक मोर्चा के आग्रह पर तीन घंटे के मार्च का आदेश दिया था, लेकिन निर्धारित अवधि खत्म होने के बाद कुछ प्रदर्शनकारियों ने एचएसबीसी बैंक की एक शाखा में तोड़फोड़, आगजनी और पथराव शुरू कर दिया।
देखते-देखते पूरा यहां हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए। हिंसा करने वाले 400 लोगों की गिरफ्तारी के बाद प्रदर्शन समाप्त हो गया। लोकतंत्र समर्थकों की मांग है कि हांगकांग के लोग 2020 में भी चीन सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को जिंदा रखें।
पांच प्रमुख मांगें
हांगकांग में लोकतंत्र समर्थकों की पांच प्रमुख मांगे हैं। इनमें मुख्य कार्यकारी व अन्य प्रतिनिधियों के चुनाव को प्रत्यक्ष सार्वभौमिक मताधिकार करने, करीब 7,000 प्रदर्शनकारियों को रिहा करने, विरोध प्रदर्शनों को अशांति न मानने और पुलिस क्रूरता की स्वतंत्र जांच शामिल है। इनके अलावा प्रदर्शनकारी चीन का विवादित प्रत्यर्पण कानून यहां कभी लागू न करने की मांग भी कर रहे हैं।