समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर रखने के बारे कानून पर भूटान के राजा की मुहर लगनी बाकी है। राजा की सहमति के बाद ही समलैंगिकता कानूनी हो जाएगा। मानवाधिकार कार्यकर्ता ताशी शेटेन ने कहा कि वह इस खबर के सुनने के बाद से बहुत गदगद है। उन्होंने संसद की इस पहल को एलजीबीटी कम्युनिटी की जीत बताया।
जश्न का माहौल
एलजीबीटी कम्युनिटी के लिए काम करने वाली संस्था रेनबो भूटान की निर्देशक शेटेन ने कहा, ''मैं समझती हूं कि समलैंगिकता पर कानून बनाने वाले विधेयक को संसद से मंजूरी मिलना मानवाधिकार की जीत के दिवस के तौर पर है और यह हर भूटानी नागरिकों की जीत है। आगे कहा, मैं समझती हूं कि हर एक व्यक्ति जो भूटान की एलजीबीटी कम्युनिटी के पक्ष में खड़ा रहा, यह उन सबकी जीत है और उन्हें आज के दिन को जश्न के तौर पर मनाना चाहिए।''
भूटान की आबादी करीब आठ लाख है और यहां कुल आबादी का अधिकांश हिस्सा बुद्ध धर्म को मानने वाला है। इस पहल के बाद भूटान समेत कई एशियाई देशों में एलजीबीटीक्यू समुदाय को लेकर प्रतिबंधों को खत्म कर दिया गया है। भारत में सदियों से चली आर रही समलैंगिकता को वर्ष 2018 में अपराध की श्रेणी से बाहर किया जा चुका है। भारत में इसको लेकर समलैंगिकता को लेकर एलजीबीटी और मानवाधिकार समर्थकों ने भी खूब जश्न मनाया था।
नेपाल में अगले साल राष्ट्रीय जनगणना के समय पहली बार एलजीबीटीक्यू की आबादी की गिनती की जाएगी ताकि उन्हें शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। बता दें कि भूटान 'सकल राष्ट्रीय खुशहाली' की सूची में बेहतर स्थिति में है।