सऊदी अरब ने सस्ते तेल के संकट से निपटने के लिए कठोर नियम लागू करने का एलान किया है, जिसमें टैक्स बढ़ाने के साथ साथ कई खर्चों में कटौती शामिल है। सरकारी मीडिया का कहना है कि इस फैसले से सरकारी तिजोरी में 100 बिलियन रियाल यानि कि करीब 27 बिलियन डॉलर का बचत होगी।
सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था में अकेले कच्चा तेल ही 70 फीसद का योगदान करता है लेकिन कोरोना महामारी की वजह से तेल की मांग में काफी कमी आ गई जिससे तेल के दाम भी गिर गए। इस समय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड के दाम 30 डॉलर प्रति बैरल है।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक सऊदी अरब को कच्चा तेल 76 डॉलर प्रति बैरल की दर से बेचने की जरूरत है। सऊदी अरब का ऑयल रेवेन्यू साल के शुरू के तीन महीने में 24 फीसद तक गिर चुका है। आईएमएफ ने इस साल सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था का 2.3 फीसद तक रहना का अनुमान लगाया है।