भारत में शहरीकरण जिस तेजी से बढ़ रहा है, उस हिसाब से यहां 10 साल तक हर साल शिकागो के आकार का एक शहर बनाना होगा। यह दावा अमेरिकी कारोबार एडवोकेसी समूह ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा ‘भारत में स्मार्ट सिटी : चुनौतियों और अवसर’ विषय पर आयोजित कॉन्फ्रेंस में किया। इस दौरान भारत-अमेरिका रणनीतिक व सहयोग फोरम (यूएसआईएसपीएफ) के अध्यक्ष मुकेश अघी ने कहा कि सिंगापुर की तरह भारत में भी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप को मजबूत कर इसका स्मार्ट सिटी फंडिंग के लिए उपयोग करना चाहिए।
अघी ने कहा कि भारत में शहरीकरण का आकार बहुत बड़ा है। इतना बड़ा कि अगर इसे पूरा करने के प्रयास किए जाएं तो हर साल हमें शिकागो जितने बड़े शहर बनाने होंगे। ऐसे में लोगों के व्यवहार में बदलाव लाना होगा। शहरों के नेतृत्व कर रहे लोगों को वित्तीय जिम्मेदारियां भी देने की जरूरत है।
पूरे विश्व के लिए एक ढांचा हो
सभी स्मार्ट सिटी के लिए पूरे विश्व में एक समान ढांचा होना चाहिए। यह केवल भारत नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए लागू होना चाहिए। यह बात प्राइसवॉटरहाउसकूपर्स इंडिया के सहयोगी व लीडर (स्मार्ट सिटी) एनएसएन मूर्ति ने कही। उन्हाेंने 24 ऐसे बिंदु प्रस्तुत किए जिन्हें स्मार्ट सिटी में रखते हुए प्रोजेक्ट बनाए जा सकते हैं। साथ ही भोपाल में स्ट्रीट लाइट का उदाहरण देकर कहा कि स्मार्ट सिटी में डिजिटल व वास्तविक दुनिया को मिलाकर राजस्व कमाने के स्रोत विकसित करने होंगे। हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के वरिष्ठ लेक्चरर प्रो. जॉन मैकोम्बर ने अपना शोध प्रस्तुत करते हुए दावा किया कि विकासशील देशों में समस्याओं के समाधान अलग तरह से निकाले जाने चाहिए।
70 प्रतिशत आबादी 4 प्रतिशत भूमि पर रहेगी
साल 2050 तक विश्व की 70 प्रतिशत आबादी केेवल 4 प्रतिशत भूमि पर निवास कर रही होगी, यह दावा ग्लोबल डिजिटल सिटीज के अध्यक्ष अमित मिधा ने किया। उन्हाेंने कहा कि यही वजह है कि हमें स्मार्ट सिटी की जरूरत है।
इंदौर-मुंबई ने 10 प्रतिशत से ज्यादा घटाए अपराध और रोग
मिधा ने कहा कि आज स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की प्रगति और बदलाव धीमे हैं, लेकिन परिणाम सकारात्मक मिल रहे हैं। इंदौर और मुंबई ने संक्रामक रोगों और अपराधों में 10 प्रतिशत से अधिक कमी की है, यह भी इसी का परिणाम है। अस्पतालों और पुलिस पर भार कम हो रहा है। समय के साथ साथ अनुभवों से सीखते हुए पूरे देश को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आने में मदद मिलेगी।