पाकिस्तान में बीते दिनों हजारा समुदाय के खनिक श्रमिकों के हुए नरसंहार की घटना से आहत श्रमिकों के परिजनों ने शवों को दफनाने से इनकार कर दिया है। साथ ही बलूचिस्तान के पश्चिमी बाईपास पर पीड़ितों के शवों के साथ धरने पर बैठे हैं। इस दौरान उन्होंने बलूचिस्तान सरकार से हत्यारों को गिरफ्तारी की मांग करते हुए सरकार से इस्तीफा देने को कहा है।
डॉन अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मासोआमा यकोबा अली (छात्रा) का कहना है कि उसने इस नरसंहार में अपने परिवार के पांच सदस्यों को खो दिया। उसने कहा कि मेरे बड़े भाई और चार अन्य रिश्तेदारों को दफन करने के लिए कोई भी पुरुष सदस्य हमारे परिवार में जीवित नहीं है।
रिपोर्ट में मुसैयद आगा रजा, बलूचिस्तान मजलिस वाहदत-ए-मुसलमीन अध्यक्ष के हवाले से कहा गया, हमने हजारा लोगों की सुरक्षा के लिए लंबे समय से धरने दिए हैं। लंबे समय से ऐसी हत्याओं का सामना कर रहे हैं और स्थिति से तंग आ चुके हैं।
आगा रजा ने कहा कि जब तक समुदाय की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक शवों को दफन नहीं किया जाएगा। सरकार के इस्तीफे की मांग करते हुए, आगा रजा ने कहा कि बलूचिस्तान सरकार बार-बार हजारा समुदाय के लोगों की रक्षा करने में विफल रही है।
उन्होंने कहा, हम प्रांतीय सरकार के इस्तीफे तक प्रदर्शन जारी रखेंगे। एक न्यायिक आयोग जिसमें शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त और बैठे न्यायाधीश शामिल हों, को इस घटना की न्यायिक जांच करने के लिए नियुक्त किया जाना चाहिए।