ईद को खुशी का अवसर माना जाता है, लेकिन गाजा के 20 लाख फलस्तीनियों में से अधिकांश सिर्फ जीवित रहने की कोशिश कर रहे हैं। गाजा पट्टी में ईद पर फलस्तीनियों में सिर्फ मतम और बेबसी नजर आ रही है। जानिए कैसे हैं हालात...।
दुनियाभर में रमजान और ईद की रौनक है। मगर गाजा पट्टी में मातम और खामोशी है। इस्राइल-हमास जंग का दंश झेल रहे फलस्तीनियों ने रमजान और ईद का कोई जश्न नहीं मनाया। गाजा पट्टी में खाद्य आपूर्ति ठप होने से बेबस फलस्तीनियों ने ध्वस्त मस्जिदों के बाहर रमजान की आखिरी नमाज अदा की। उन्होंने इस्राइल-हमास यु्द्ध के अंत की दुआ की। फलस्तीनियों ने कहा कि यह दुख की ईद है।
यूं तो ईद को खुशी का अवसर माना जाता है, जब परिवार दावत के लिए इकट्ठा होते हैं और बच्चों के लिए नए कपड़े खरीदते हैं, लेकिन गाजा के 20 लाख फलस्तीनियों में से अधिकांश सिर्फ जीवित रहने की कोशिश कर रहे हैं। डेर अल-बलाह में नमाज के बाद आदिल अल-शायर ने कहा कि यह दुख की ईद है। हमने अपने प्रियजनों , अपने बच्चों, अपने जीवन और अपने भविष्य को खो दिया है। एक अन्य सईद अल-कुरद ने कहा कि हत्या, विस्थापन, भूख और घेराबंदी है। हम बच्चों को खुश करने के लिए भगवान के अनुष्ठान करने के लिए बाहर जाते हैं, लेकिन ईद की खुशी के लिए? यहां कोई ईद नहीं है।
इस्राइल हमास युद्ध विराम समाप्त होने के बाद जंग फिर शुरू हो गई। इस्राइली हमलों में सैकड़ों फलस्तीनी मारे गए हैं और इस्राइल ने चार सप्ताह तक कोई भोजन, ईंधन या मानवीय सहायता नहीं आने दी है। जंग की शुरुआत हमास की ओर से 7 अक्तूबर, 2023 को इस्राइल पर किए गए हमले से हुई थी। इसमें लगभग 1,200 लोगों की जान गई थी। इस दौरान 251 लोगों का अपहरण कर लिया गया था। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इस्राइल के जवाबी हमले में अब तक 50,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं।