वैश्विक आतंकी हाफिज सईद (फाइल फोटो)
हाजिफ सईद को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने वैश्विक आतंकी घोषित कर दिया है। भारत में भी नए कानून के तहत उसे व्यक्तिगत आतंकी घोषित किया जा चुका है। मगर दिलचस्प बात यह है कि आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक लाहौर की इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी में दो दशक से ज्यादा समय तक प्रोफेसर के तौर पर कार्यरत था और सेवानिवृत्ति के बाद उसे बकायदा पेंशन भी मिल रही थी।
पाकिस्तान को हाफिज सईद ने एक पत्र लिखा है जिसमें उसने सीज फंड को जारी करने की मांग की है। इस फंड को यूएनएससी के दिशा-निर्देश पर सीज किया गया है। यह पैसा यूनिवर्सिटी से सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली पेंशन का है। पाकिस्तान की लाहौर इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी में सईद असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर 1999 तक पढ़ा रहा था। वहीं 1974 में उसने यूनिवर्सिटी में पढ़ाना शुरू कर दिया था।
संयुक्त राष्ट्र में मौजूद पाकिस्तान के स्थायी सदस्य ने यूएनएससी पैनल से कहा, '1999 में सेवानिवृत्ति के बाद उसे 45,700 रुपये पेंशन के तौर पर दिए जा रहे थे। यह रकम उसके बैंक खाते में जमा कराई जाती थी।' इस पेंशन पर तब रोक लग गई जब यूएनएससी ने उसे 2008 में वैश्विक आतंकी घोषित किया था और उसके सभी बैंक खातों को सीज कर दिया गया।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार दस्तावेज से पता चलता है कि पाकिस्तान सरकार जो सईद को पेंशन दिया करती थी उसके पास सईद के 11 लाख रुपये बकाया हैं। उसपर प्रतिबंध लगने के कारण वह उसे पेंशन नहीं दे पाई है। यहां गौर करने वाली बात यह है कि 1990 में सईद ने आतंकी संगठन की स्थापना की थी जबकि वह 1999 तक कॉलेज में पढ़ा रहा था। एक भारतीय अधिकारी ने कहा कि यह पहली बार है जब पाकिस्तान ने इस बात को कबूला है कि सईद कॉलेज में ऑन रोल (तनख्वाह) पर था।
भारतीय अधिकारियों ने कहा कि इससे पता चलता है कि आतंकी संगठन चलाने वाले व्यक्ति को किस तरह पाकिस्तान ने शह दी हुई थी। उसकी पाकिस्तानी सेना, सैन्य प्रतिष्ठानों आदि में पहुंच है। 1993 से सेना और नागरिकों को टारगेट करने की वजह से यूएनएससी ने 2008 में मुंबई आतंकी हमलों के बाद सईद पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस हमले में 160 से ज्यादा लोग मारे गए थे।