अफ्रीकी देश माली में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। शुक्रवार को वाहनों के एक काफिले पर बंदूकधारियों ने हमला कर दिया, जिसमें 25 नागरिक मारे गए। ये काफिला माली की सेना की निगरानी में जा रहा था। एक सैन्य प्रवक्ता ने रविवार को बताया कि मरने वालों में अधिकतर सोने की खदान में काम करने वाले खनिक थे।
यह हमला शुक्रवार को देश के उत्तर-पूर्व में स्थित सबसे बड़े शहर गाओ से लगभग 30 किलोमीटर दूर हुआ, जहां सत्तारूढ़ जुंटा के विरोधी सशस्त्र समूह सक्रिय हैं। यह इस वर्ष नागरिकों पर किया गया सबसे घातक हमला है।
सेना के प्रवक्ता कर्नल मेजर सौलेमेन डेम्बेले ने बताया कि हमलावरों ने सेना द्वारा संचालित लगभग 60 वाहनों के काफिले को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि हमलावरों में से चार घायल हो गए। हालांकि, उन्होंने सेना के किसी कर्मी के घायल या हताहत होने पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
गाओ के एक स्थानीय ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया, मेरी बहन हमले में बच गई, लेकिन वह मानसिक सदमे में है। उसने बहुत से लोगों को मृत और घायल देखा, पूरी तरह से भयावह दृश्य। यह पहली बार था जब उसने मृत लोगों को देखा था।
इस भयानक हमले की अभी तक किसी भी हथियारबंद समूह ने जिम्मेदारी नहीं ली है। बता दें कि इस क्षेत्र में कई समूह सक्रिय हैं, जिनमें इस्लामिक स्टेट समूह, अल-कायदा से जुड़ा जेएनआईएम और माली के सैन्य शासन के विरोधी अजावाद क्षेत्र के कई समूह शामिल हैं। माली में 10 साल से ज्यादा समय से हिंसा देखने को मिल रही है। देश में सेना ने 2020 में चुनी गई सरकार की अलोकप्रियता का लाभ उठाते हुए सत्ता उसे सत्ता से बेदखल कर दिया था। जिसके बाद से नए शासन को आतंकवादी हमलों से जूझना पड़ रहा है।