सऊदी अरब के जिस शख्स को फोर्ब्स पत्रिका 2007 में दुनिया के शीर्ष 100 अमीरों की सूची में शामिल कर चुकी है उसकी कंपनी अब दिवालिया हो गई है। दुनिया के सबसे दौलतमंद लोगों में शुमार मान-अल साने की कंपनी (साद ग्रुप) इन दिनों बड़ी आर्थिक तंगहाली से गुजर रही है। सऊदी सरकार ने साने को दिया गया कर्ज वसूलने के लिए उनकी संपत्ति को नीलाम करने का फैसला लिया है। दिवालिया घोषित होने के बाद लेनदारों ने भी उनका पैसा वापस लेने के लिए साने पर केस दर्ज कराया है।
वक्त का यह बड़ा खेल था कि दुनिया के शीर्ष अरबपतियों में शुमार मान-अल साने का साद ग्रुप मात्र दो साल में कर्ज नहीं चुका पाने के कारण दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गया। साने को लगातार कर्ज चुकाने की मोहलत दी गई लेकिन जब उन्होंने ऐसा नहीं किया तो पिछले साल उन्हें सऊदी सरकार ने हिरासत में ले लिया। अब जेद्दा और रियाद में लगने वाली नीलामी की बोली साद समूह की देश भर के कई शहरों में फैली संपत्ति के लिए लगेगी। इस नीलामी में दो अरब रियाल (करीब 19 से 38 अरब रुपये) तक की बोली लगेगी।
आलीशान बंगलों, घर और वाहनों की बोली लगेगी
इस नीलामी में दुनिया के शीर्ष अरबपति रहे मान-अल साने के आलीशान बंगलों और मौजूदा घर के साथ ट्रक, बस गोल्फ कोर्ट और महंगे जेसीबी वाहनों की भी बोली लगेगी। एक सूत्र ने बताया कि अभी स्पष्ट नहीं है कि नीलामी से मिली रकम का बंटवारा कैसे किया जाएगा, लेकिन देनदारों के साथ-साथ वसूली गई इस रकम का कुछ पैसा पूर्व कर्मचारियों को भी दिया जा सकता है।
सऊदी अरब के इतिहास का सबसे बड़ा कर्ज विवाद
साद समूह के इस कर्ज विवाद को सऊदी अरब के इतिहास का सबसे बड़ा विवाद माना जा रहा है। इस नीलामी की जिम्मेदारी एतकॉन समूह को दी गई है। तीन जजों के ट्रिब्यूनल ने देनदारों की रकम चुकाने के लिए समूह की संपत्ति की नीलामी के आदेश कई दलीलों और तर्कों को बारीकी से सुनने और विश्लेषण करने के बाद जारी किए हैं।