फलस्तीन द्वारा संयुक्त राष्ट्र में उसकी सदस्यता की मजबूत दावेदारी की कोशिश को समर्थन देने के लिए भारत सहित गुट निरपेक्ष राष्ट्रों की वेस्ट बैंक के रमल्ला में प्रस्तावित बैठक इस्राइल के विरोध के बाद आखिरी क्षणों में रद्द करनी पड़ी। इस्राइल ने उसके द्वारा अधिग्रहित रमल्ला के में पांच देशों के प्रतिनिधियों को प्रवेश देने से मना कर दिया गया था।
फलस्तीन प्रशासन (पीए) की 12 नॉन अलाइड मूवमेंट (नाम) देशों के साथ बैठक रविवार शाम को प्रस्तावित थी। इस दौरान विभिन्न देशों के मंत्री और प्रतिनिधि दो दिनों तक विचार विमर्श करते। यहां फलस्तीन की यूएन में मजबूत दावेदारी के लिए एक प्रस्ताव पर सभी सदस्यों द्वारा हस्ताक्षर भी किया जाता।
इस्राइल ने बांग्लादेश, मलयेशिया, इंडोनेशिया, और क्यूबा जैसे देशों के मंत्रियों और प्रतिनिधियों को प्रवेश देने से इनकार किया। बैठक रद्द होने के बाद भारत के विदेश मंत्रालय के सचिव (ईस्ट) संजय सिंह को बीच रास्ते से ही नई दिल्ली के लिए वापस लौटना पड़ा। इसमें उन देशों के प्रतिनिधियों को आने से रोका गया, जिनका इस्राइल के साथ कोई राजनयिक संबंध नहीं है। इस्राइली विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि भारत जैसे अन्य देशों के अधिकारियों को इसलिए वेस्ट बैंक आने से नहीं रोका गया, क्योंकि इन देशों के हमारे साथ विशेष राजनयिक संबंध हैं।
क्या है ‘नाम’
गुट निरपेक्ष आंदोलन (नाम) राष्ट्रों की एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जिन्होंने यह निश्चय किया है कि वे विश्व के किसी भी पावर ब्लॉक (शक्तिशाली देश) के गुट में नहीं रहेंगे। यह आंदोलन भारत के प्रधान मंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति गमाल अब्दुल नासर एवं युगोस्लाविया के राष्ट्रपति जोसिप ब्रॉज़ टीटो द्वारा शुरू किया गया था। इसकी स्थापना अप्रैल 1955 में हुई थी और 2007 तक तक इसमें 118 सदस्य हो चुके थे।
कभी काफी प्रभावी रहा है ‘नाम’
अमेरिका और रूस के बीच शीतयुद्ध के समय में गुट निरपेक्ष आंदोलन (नाम) काफी प्रभावशाली रहा है। दोनों देशों के बीच वर्ष 1947 से लेकर 1999 तक कोल्ड वार छिड़ा रहा। नाम के गठन होने के बाद दोनों ही देश इस संगठन को अपने साथ लाने की कोशिश करते रहे।