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इस्राइल की संसद में फलस्तीनियों की जमीन छीनने का कानून पास

Wed, 08 Feb 2017 03:56 AM IST
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस/ येरुशलम
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इस्राइल की संसद ने अंतत: उस विवादित कानून को 60-52 मतों से मंजूरी दे दी है जिस पर वेस्ट बैंक स्थित फलस्तीन के लोग अपना अधिकार जताते आए हैं। इस कानून के पास होने से फलस्तीन के दावे वाली निजी जमीन पर यहूदी बस्तियों की बसाहट को कानूनी मान्यता मिल गई है। 
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प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसकी जानकारी अमेरिकी प्रशासन को दे दी है। इस कानून को फलस्तीन की जमीन की कानूनी चोरी भी बताया जा रहा है। देश का हाईकोर्ट इस कानून को निरस्त कर देगा, यह जानते हुए भी दक्षिणपंथी उत्साहित हैं।

कानून के विरोध में मत डालने वाले 52 सदस्यों ने चेतावनी दी कि यह कानून इस्राइल को नुकसान पहुंचाएगा। संयुक्त राष्ट्र ने भी कहा है कि इससे शांति स्थापना के अवसर कमजोर होंगे। यहूदियों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था अमेरिकन ज्यूइश कमेटी के प्रमुख डेविड हैरिस ने कहा कि हाई कोर्ट इस कानून को पलट सकता है और उसे ऐसा करना ही चाहिए। 
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ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद उत्साहित हैं इस्राइल के नेता

डोनाल्ड ट्रंप
उन्होंने संसद के इस कदम को दिशाहीन बताया। पीएम नेतन्याहू के अटॉर्नी जनरल ने भी इस कानून को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि वह इस कानून के लिए सुप्रीम कोर्ट में पैरवी नहीं करेंगे। आलोचकों का मानना है कि यह कानून देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी लड़ाई में फंसा सकता है।

इस कानून के बन जाने के बाद वेस्ट बैंक में फलस्तीनी लोगों की निजी जमीन पर बने इस्राइली नागरिकों के घरों को वैध करने का अधिकार इस्राइली सरकार को मिल जाएगा। कानूनी मंजूरी मिलने के बाद इस विवादित क्षेत्र में यहूदी बस्तियों का फैलाव और तेज हो जाएगा, जिसे रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र कह चुका है। इस कानून के तहत जिन फलस्तीनियों की जमीन पर इस्राइली यहूदियों ने घर बना लिये हैं वे इसके बदले में मुआवजा या बदले में कहीं और जमीन ले सकते हैं, जबकि इसके लिए फलस्तीन की सहमति जरूरी नहीं होगी।

इस्राइल की दक्षिणपंथी सरकार ने अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से कई ऐसे कदम उठाए हैं जो फलस्तीन से उसके विवाद को और बढ़ा सकते हैं। हालांकि ट्रंप ने पिछले हफ्ते ही एक बयान जारी कर कहा था कि यह बस्तियां इस्राइल-फलस्तीन शांति समझौते के लिए सहायक साबित नहीं होंगी, लेकिन ट्रंप इस मसले पर बस्तियों की बसाहट को अपना समर्थन भी दे चुके हैं। इसी माह नेतन्याहू भी ट्रंप से मिलने वाले हैं। 
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