सात सदस्यों वाले एक भारतीय परिवार ने दावा किया है कि वे शारजाह में कैदियों की तरह जीवन जी रहा है। उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सरकार से गुहार लगाई है कि उन्हें कानूनी निवासी का दर्जा दिया जाए ताकि गिरफ्तारी और निर्वासन के भय से परिवार को मुक्ति मिल सके।
खलीज टाइम्स की शुक्रवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, परिवार में तीन लोगों के पास वीजा और पासपोर्ट नहीं है। उनके पास पर्याप्त खाना भी नहीं है। परिवार के ऐसे भी दिन आए है जब उन्हें एक काबोस (अरबी ब्रेड) पर जीवित रहना पड़ा है।
केरल के मधुसूदनन (60) और उनकी श्रीलंकाई पत्नी रोहिणी (55) ने कहा कि वे चाहते हैं कि उनके पांचों बच्चों को सामान्य जीवन मिले सके, जो अपनी जिंदगी में कभी स्कूल तक नहीं गए हैं। उनकी चार बेटियां व एक बेटा है।
बच्चों ने झेला बचपन से कष्ट
मधुसूदन ने कहा, एक बार को छोड़कर बच्चे यूएई के बाहर नहीं गए। उन्होंने बचपन से कष्ट झेला है। मैं चाहता हूं कि बच्चों को बेहतर जिंदगी मिले। वहीं रोहिणी ने कहा, बच्चे बाहर जाने में डरते हैं। हम बंदियों की तरह रह रहे है।
मैंने अपने परिवार के लिए अपनी जिंदगी के 30 साल कुर्बान कर दिए। मेरे बच्चे बेहतर जिंदगी के हकदार हैं। मधुसूदन 1979 में बतौर कामगार यूएई आया था और उसने 1988 में रोहिणी से विवाह किया था।