चार अरब देशों द्वारा प्रतिबंध लगाने के बाद कतर ने अब खुद अपने पैरों पर खड़े होने की तैयारी कर ली है। दुनिया में सबसे ज्यादा प्रति व्यक्ति आय वाले देश (जिसे सरल भाषा में सबसे अमीर देश भी कहा जा सकता है) अब खुद में आत्मनिर्भर होने की कवायद में लग गया है। और इसमें उसकी ताकत बने हैं उसके नागरिक, जो पूरी मजबूती के साथ संकट के इस दौर में अपने देश के साथ खड़े हैं।
इसकी बानगी उस समय भी देखने को मिली जब कतर के एक रईस बिजनेशमैन मोताज अल खयात ने आस्ट्रेलिया और अमेरिका से 4 हजार से ज्यादा गायों को खरीदकर अपने देश पहुंचाने की तैयारी कर ली है। इन गायों को कतर एयरवेज की फ्लाइट से एयर लिफ्ट कर दोहा और उसके आसपास के इलाकों में लाया जाएगा।
गायों के पालन और दूध की सप्लाई के लिए जरूरी संसाधन भी जुटा लिए गए हैं। इसके अलावा देश के नागरिकों ने विदेश उत्पादों को त्यागकर स्वदेशी सामान को अपनाने की मुहिम भी शुरू कर दी है। मतलब साफ है कि कतर किसी सूरत में अरब देशों की दबंगई के आगे झुकने को तैयार नहीं है।
अपनी दौलत को बनाया अपना हथियार
खास बात ये है कि कतर इन प्रतिबंधों को हटवाने के लिए किसी दूसरे देश से मदद की गुहार भी नहीं लगाना चाहता। इस संकट से निपटने के लिए कतर ने अपनी अकूत दौलत और समृद्ध तेल भंडार को अपनी ताकत बनाने की तैयारी कर ली है।
कतर को अरब देशों में सबसे अमीर और विकसित माना जाता है उसकी यही खूबी दूसरे खाड़ी मुल्कों की आंखों में खटकती है और यही बात खुद को अरब मुल्कों के अगुआ मानने वाले सऊदी अरब को भी परेशान करती रही है। इसीलिए मामूली से आरोपों के बीच सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे मुल्कों ने एक झटके में कतर के खिलाफ प्रतिबंध ठोक दिए, जबकि कतर उन आरोपों पर सफाई देता ही रह गया।
अपने अपार तेल और गैस भंडार की बदौलत ही कतर दुनिया के सबसे रईस देशों में शुमार है। कतर में प्रति व्यक्ति 145000 डॉलर से अधिक है। कतर की रईसी का आलम ये है कि इस देश ने दुनिया के तमाम बड़े मुल्कों में निवेश कर रखा है। एक अनुमान के मुताबिक कतर ने दुनियाभर में 335 बिलियन डॉलर का निवेश किया हुआ है।
लंदन की बड़ी बड़ी इमारतों पर कतर का हक
दुनिया की आर्थिक राजधानी लंदन के बारे में तो कहा जाता है कि यहां की आधी से ज्यादा जमीन कतर के ही नाम है जिसने यहां बड़े बड़े निवेश कर रखे हैं। बीबीसी की खबर के अनुसार प्रॉपर्टी रिसर्च कंपनी डाचा के मुताबिक, लंदन में कतर के पास 879 कमर्शियल और रेजिडेंशियल संपत्तियां हैं। इनमें से 26 मिलियन स्कवायर फीट जमीन कमर्शियल कैटेगरी में आती है। लंदन की जिन बड़ी इमारतों का दुनियाभर में गुणगाण होता है उन पर मालिकाना हक कतर का है।
प्रापर्टी के इस साम्राज्य में कैनेरी वार्फ ग्रुप का बड़ा हक है जिसे कतर ने दो साल पहले ब्रुकफील्ड प्रापर्टी पार्टनर्स के साथ मिलकर 2.6 बिलियन पाउंड में खरीदा था। इस ग्रुप के पास लंदन के साउथ बैंक में बना शैल सेंटर और वॉकी टॉकी बिल्डिंग है। कतर के पास लंदन के सेवाय होटल में दस फीसदी और शार्ड होटल में 95 फीसदी की हिस्सेदारी है।
इसके लिए जनरल डिपार्टमेंटल स्टोर की चेन हैराड्स को भी कतर ने 1.5 बिलियन पाउंड में खरीदा है। लंदन के प्रमुख बार्कले बैंक में भी कतर की बड़ी हिस्सेदारी है।
तेल और गैस के अकूत भंडार की बदौलत सबसे आगे निकला कतर
हालांकि कतर शुरू से इतना रईस मुल्क नहीं रहा है। कतर में साल 1873 में कुवैत के अल खलीफ वंश ने अपना शासन शुरू किया था, इसके बाद कुछ सालों तक यहां तुर्की का शासन रहा। प्रथम विश्व युद्ध के बाद इंग्लैंड ने इस पर कब्जा कर लिया और लंबे समय तक यहां ब्रिटिश शासन रहा। साल 1971 में इंग्लैंड से मुक्ति मिलने के बाद कतर ने सऊदी अरब के साथ जाने से इंकार कर दिया, जिसके बाद इसे अलग मुल्क का दर्जा दे दिया गया। साल 1982से यहां खलीफा बिन हमद का शासन शुरू हुआ, जो अब तक जारी है।
इंग्लैंड से आजादी के बाद कतर ने पिछले चालीस सालों में काफी तेजी से तरक्की है। इस मुल्क ने अपनी तेल संपदा की ताकत को पहचाना और इसके दम पर दुनिया में बड़ा व्यापार किया। कतर के निर्माण उद्योग ने दुनियाभर में अपनी अलग पहचान बनाई। राजधानी दोहा की गगनचुंबी इमारतें खाड़ी मुल्कों के साथ साथ विकसित देशों के सामने भी सीना तानकर खड़ी हैं।
अब अपनी इसी अकूत दौलत की बदौलत कतर ने पूरी तरह आत्मनिर्भर होने की तैयारी शुरू कर दी है। उसकी मौजूदा सबसे बड़ी जरूरत है खाद्य उत्पादन जिसके लिए वह लगभग पूरी तरह दुनिया के दूसरे मुल्कों पर निर्भर है।
हालांकि इस कठिन वक्त में ईरान उसकी मदद को आगे आया है और उसने कई जहाज भरकर खाद्यान्न कतर के लिए भिजवाया है। आगे भी उसने इसी तरह मदद का भरोसा दिया है। हालांकि इन सबसे अलग कतर ने खुद भी इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है और साल 2030 तक खाद्यान्न उत्पादन में खुद को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के लिए कमर कस ली है।