सात अप्रैल को सीरिया की राजधानी दमिश्क के पास डूमा शहर में कथित रासायनिक हमले में 40 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। एक वीडियो सामने आया था, जिसमें कुछ बच्चे सांस लेने के लिए जूझते हुए नजर आ रहे थे। इस घटना ने सभी को सकते में डाल दिया।
इस हमले के लिए सीरिया में बशर अल-असद सरकार को जिम्मेदार मानते हुए अमरीका, ब्रिटेन और फ्रांस ने मिलकर सीरिया के कुछ ठिकानों पर मिसाइलों से हमला कर दिया। सीरिया के सहयोगी रूस ने इन हमलों का विरोध किया, मगर यूरोपीय संघ आदि हमले के समर्थन में थे।
सवाल उठता है कि जब सीरिया में इतने दिनों से चल रही लड़ाई में जानमाल का भारी नुकसान हो रहा है, हर तरह के हथियार इस्तेमाल हो रहे हैं, तो फिर डूमा पर हुए कथित रासायनिक हमले पर इतना आक्रोश कैसे फैल गया? रासायनिक हथियारों का इतना विरोध क्यों होता है?
विज्ञान पत्रकार पल्लव बागला कहते हैं कि दूसरे हथियारों के मुकाबले रासायनिक हथियारों को ज्यादा खतरनाक माना जाता है।
वो बताते हैं, "हर हथियार तबाही लाता है और उसके नुकसान का एक पैमाना होता है। डायनामाइट, टीएनटी या न्यूक्लियर हथियार की अपनी क्षमता होती है। इसी तरह केमिकल वेपन्स को बुरा माना जाता है क्योंकि मारक क्षमता ज्यादा होती है और आम जनता को ज्यादा नुकसान होता है।''
''इसे आप टारगेट नहीं कर पाते कि आर्म्ड फोर्सेज ही निशाना बनें। इनका प्रभाव पूरे शहर में हो जाता है। इसीलिए इन्हें इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसके बावजूद ये हथियार कभी-कभी इस्तेमाल होते हैं। अमरीका ने भी वियतनाम युद्ध के दौरान ऐसे हथियार इस्तेमाल किए थे।"
तबाही मचाने वाले हथियार
रासायनिक हथियारों को वेपन्स ऑफ मास डिस्क्ट्रक्शन यानी भयंकर तबाही मचा देने की क्षमता रखने वाले हथियारों की श्रेणी में रखा जाता है। इस श्रेणी में रेडियोलॉजिकल, जैविक और परमाणु हथियार भी शामिल हैं। इन सबमें से रासायनिक हथियारों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है।
इसकी वजह के बारे में पल्लव बागला बताते हैं, "ये पुअर मेन्स वेपन कहे जाते हैं। यानी रासायनिक हथियारों को बनाना, इनका रख-रखाव करना और इन्हें इस्तेमाल करना बहुत आसान है। इसकी मारक क्षमता भी ज्यादा होती है। इसी कारण ये इस्तेमाल किए जाते हैं।''
''वहीं जैविक हथियारों का इस्तेमाल कम देखा गया है और युद्ध के समय तो इनका कोई जिक्र नहीं है। दूसरी तरफ परमाणु हथियार बहुत मंहगे हैं और अब तक एक ही बार इस्तेमाल हुए हैं, जब अमरीका ने हिरोशिमा और नागासाकी पर बम गिराए थे।"
जानकार बताते हैं कि जिस देश के पास औद्योगिक क्षमता है, वह आसानी से रासायनिक हथियार बना सकता है। उदाहरण के लिए क्लोरीन गैस, जिसके सीरिया में कई मौकों पर इस्तेमाल होने की बात सामने आ चुकी है।
क्लोरीन गैस को लेकर विज्ञान पत्रकार पल्लव बागला बताते हैं, "क्लोरीन का आमतौर पर बहुत इस्तेमाल होता है। वॉटर फिल्टरेशन प्लांट में इसका इस्तेमाल होता है, इसे बड़े पैमाने पर तैयार किया जाता है और सिलिंडर में ट्रांसपोर्ट किया जाता है। इस गैस का पूरी दुनिया में आम इस्तेमाल होता है। इसे केमिलकल वॉर में इस्तेमाल करना बहुत आसान है।"