कच्चे तेल के उत्पादन के मामले में इस साल अमेरिका दुनिया के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक देश सऊदी अरब को पीछे छोड़ देगा। ऐसा इसलिए अनुमान लगाया जा रहा है क्योंकि तेल की बढ़ती कीमतों से उत्साहित अमेरिकी शेल कंपनियों ने उत्खनन गतिविधियां बढ़ा दी हैं।
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने शुक्रवार को अपने मासिक मार्केट रिपोर्ट में कहा कि यह साल अमेरिका के लिए रिकॉर्ड बनाने का साल साबित होने वाला है। आईईए ने कहा कि अमेरिका में प्रतिदिन 99 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन का आंकड़ा 50 वर्षों के उच्चतम स्तर पर है, जिसके साथ ही इसका कुल तेल उत्पादन
सऊदी अरब के उत्पादन के करीब पहुंच गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ओपेक/गैर-ओपेक देश अपने समझौते पर कायम रहते हैं, तो साल 2018 के दौरान कच्चे तेल के उत्पादन में निरंतर वृद्धि से अमेरिका प्रतिदिन एक करोड़ बैरल उत्पादन के ऐतिहासिक स्तर को पार करने के साथ ही सऊदी अरब को पीछे छोड़ते हुए रूस का प्रतिद्वंद्वी बन जाएगा।
वैश्विक स्तर पर तेल के बहुतायत के कारण साल 2016 की शुरुआत में तेल की कीमतें 30 डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर पर पहुंच गई थीं। लेकिन बाद में तेल उत्पादक देशों ने (ओपेक तथा गैर ओपेक दोनों) ने उत्पादन में कटौती करने तथा कीमतों को ऊपर उठाने के लिए साल 2016 के अंत में आपस में एक समझौता किया। वैश्विक तनाव तथा तेल के भंडार में कमी ने भी तेल की कीमतों को ऊपर चढ़ने में योगदान दिया।
ओपेक तथा गैर-ओपेक देशों द्वारा कच्चे तेल के उत्पादन में संयुक्त कटौती की अवधि को इस साल के अंत तक बढ़ाने पर सहमति जताने के बाद साल 2014 के बाद पहली बार कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई।