सऊदी अरब, यूएई और कतर अब अपनी सुरक्षा रणनीति बदलते दिख रहे हैं और वे सिर्फ अमेरिका पर निर्भर रहने की बजाय अन्य देशों से भी रक्षा उपकरण खरीद रहे हैं। अमेरिकी हथियारों की आपूर्ति में देरी और यूक्रेन युद्ध के कारण पैट्रियट मिसाइलों की कमी ने इन देशों को जापान, दक्षिण कोरिया और यूक्रेन जैसे देशों के साथ नए रक्षा समझौते करने के लिए मजबूर किया है। पढ़िए रिपोर्ट-
खाड़ी देशों के आसमान में चमकती गगनचुंबी इमारतों के बीच हाल में बैलिस्टिक मिसाइलों और शाहेद ड्रोनों की गूंज ने रक्षा नीतियों को हिला दिया है। ईरान के साथ जारी तनाव के बीच सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कतर जैसे देश अब अपनी रक्षा जरूरतों के लिए केवल वाशिंगटन की ओर नहीं देख रहे। सैकड़ों अरब डॉलर खर्च करने के बाद भी अचूक सुरक्षा न मिलने और अमेरिकी हथियारों की आपूर्ति में देरी ने इन देशों को रक्षा खरीद के विविधीकरण के लिए मजबूर कर दिया है।
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पिछले पांच वर्षों में केवल सऊदी अरब ने रक्षा पर 28 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। 2019 में सऊदी तेल ठिकानों पर हुए हमलों के वक्त देश की रक्षा प्रणाली कमजोर दिखी थी, लेकिन हालिया संघर्षों में खाड़ी देशों ने लगभग 85% ईरानी ड्रोनों और मिसाइलों को मार गिराया। इस सफलता के बावजूद पेंटागन की लंबी प्रतीक्षा सूची और यूक्रेन युद्ध के कारण अमेरिका से पैट्रियट मिसाइलों की आपूर्ति में आ रही बाधाओं ने खाड़ी देशों की चिंता बढ़ा दी है। नतीजतन सऊदी अरब अब जापान से पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणालीं के घटकों और दक्षिण कोरियाई कंपनियों-हनवा और एलआईजी नेक्स1 से एम-एसएएम मध्यम दूरी की मिसाइल प्रणाली के लिए बातचीत कर रहा है। यूएई पहले ही इस दक्षिण कोरियाई प्रणाली को तैनात कर चुका है। वहीं, खाड़ी देश यूक्रेन से बैटल-टेस्टेड इंटरसेप्टर ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम हासिल करने के लिए समझौते कर रहे हैं।
अन्य देशों के साथ भी बेहतरीन संबंध : सऊदी अरब
सऊदी अरब के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यूक्रेन के साथ समझौतों का हवाला देते हुए कहा, हम अमेरिकी प्रदाताओं के साथ निर्बाध रूप से काम कर रहे हैं, लेकिन हमारे अन्य देशों के साथ भी बेहतरीन संबंध हैं। यूएई के अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से भरोसा जताते हुए कहा कि उनके पास विविध, एकीकृत और बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली और रणनीतिक भंडार मौजूद है।
अब रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा अमेरिका को नहीं देंगे : कार्नी
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने लिबरल पार्टी के सम्मेलन में कहा कि अब उनका देश अपने रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा अमेरिका को नहीं देगा। उन्होंने कहा, वे दिन लद गए, जब कनाडा की सेना अपने हर डॉलर में से 70% हिस्सा अमेरिका भेजती थी। लंदन के पास आयोजित एक बैठक में ब्रिटिश रक्षा मंत्री ल्यूक पोलार्ड ने उद्योग जगत से 30, 60, या 90 दिनों में तत्काल रक्षा आपूर्ति का उद्देश्य रक्षा योजनाओं में संभावित देरी या कमियों को दूर करना तथा रॉयल नेवी की टाइप 26/31 जैसे कार्यक्रमों के लिए परिचालन तत्परता सुनिश्चित करना बताया था।