ताजिकिस्तान के सुरक्षा बलों के हाथों दो आतंकवादियों के मारे जाने की खबर सामने आने बाद से पूरे मध्य एशिया में अफगानिस्तान में बन रहे हालत को लेकर चिंता बढ़ गई है। जानकार आतंकवाद पर नियंत्रण रख पाने की तालिबान की क्षमता पर अब सीधे सवाल उठा रहे हैं।
ताजिक अधिकारियों के मुताबिक दो आतंकवादी पिछले अप्रैल के आखिर में अफगानिस्तान से लगी सीमा पार कर ताजिकिस्तान में घुस गए। सुरक्षा बलों ने तब उन्हें मार गिराया। उनके पास हथियारों का जखीरा, गोला-बारूद और विस्फोटक बरामद हुए। अधिकारियों ने दावा किया है कि दोनों आतंकवादिनों ने ताजिकिस्तान में हमला करने के मकसद से घुसपैठ की थी।
विश्लेषकों के मुताबिक यह घटना लगभग उसी समय हुई, जब उज्बेकिस्तान में अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों के मंत्रियों की बैठक हुई थी। इस बैठक का मकसद सीमा पार से पेश आ रही आतंकवाद की चुनौती का मुकाबला करना था। अगस्त 2021 में तालिबान ने काबुल पर कब्जा जमा लिया था। वहां सरकार बनाने के बाद उसने वादा किया था कि वह अपनी धरती पर आतंकवादी संगठनों को सक्रिय नहीं रहने देगा। लेकिन वह ऐसा करने में नाकाम रहा है।
जानकारों के मुताबिक जिन आतंकवादी गुटों के साथ मिल कर तालिबान ने अमेरिकी फौज के खिलाफ दो दशक तक लड़ाई लड़ी थी, अब उन पर ही काबू पाना उसके लिए मुश्किल साबित हो रहा है। हाल के महीनों में अफगानिस्तान में दो गुटों की सक्रियता बढ़ी है। ये गुट हैं- इस्लामिक मूवमेंट ऑफ उज्बेकिस्तान और जमात अंसारुल्लाह। जमात अंसारुल्लाह को ताजिक तालिबान के नाम से भी जाना जाता है।
पाकिस्तान में इस्लामाबाद स्थित सिक्योरिटी कंसल्टैंसी खोरासान डायरी में अनुसंधान प्रमुख रिकार्डो वेले ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से बातचीत में कहा है- ‘तालिबान को अपने कुछ पुराने सहयोगी संगठनों को नियंत्रित करने में सफलता मिली है। कुछ ऐसे संगठन हैं, जिनका एकमात्र उद्देश्य हथियारबंद लड़ाई के जरिए मध्य एशियाई देशों में सत्ता को पलटना है।’
ऐसे गुटों के अलावा अफगानिस्तान में आईएसआईएस (के) गुट की गतिविधियां भी जारी हैं। इस गुट ने हाल में अफगानिस्तान के अंदर भी कई भीषण हमले किए हैं। उसने पूरे मध्य एशिया में “जिहाद” शुरू करने का संकल्प भी जताया है। जानकारों के मुताबिक तालिबान ने आईएसआईएस (के) पर काबू पाने की कोशिश गंभीरता से की है। लेकिन इसमें उसे कामयाबी नहीं मिली है।
अमेरिका स्थित संस्था सूफान ग्रुप में अनुसंधान निदेशक कॉलिन क्लार्क ने कहा है- ‘आईएसआईएस (के) मध्य एशिया देशों के लिए बड़ा खतरा पेश कर रहा है। वह उज्बेकिस्तान में रॉकेट दाग चुका है। लेकिन खतरा सिर्फ इसी प्रकार का नहीं है। बल्कि उसकी सक्रियता यह बताती है कि मध्य एशियाई देशों में विदेशी आतंकवादियों की वापसी हो रही है। उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान और क्षेत्र के अन्य देशों के लिए यह गहरी चिंता का पहलू है।’
हाल ही में आईएसआईएस (के) ने उज्बेकिस्तान और ताजिकिस्तान के नेताओं की हत्या करने की धमकी दी थी। उसने मध्य एशिया के उन धार्मिक नेताओं को भी चेतावनी दी थी, जो मजहबी आतंकवाद का विरोध कर रहे हैं।