अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवाओं के निदेशक के वरिष्ठ सलाहकार डगलस रैंड ने कहा कि भारत समेत चीन, मेक्सिको व फिलीपीन के लोगों के लिए ग्रीन कार्ड के लंबे और कष्टदायक इंतजार की वजह इसके आवंटन में हर देश के लिए निर्धारित कोटा व्यवस्था है। उन्होंने कहा, इसे सिर्फ संसद ही बदल सकती है। ग्रीन कार्ड को आधिकारिक रूप से स्थायी निवास कार्ड के रूप में जाना जाता है।
वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी डगलस रैंड ने कहा कि अमेरिका में स्थायी रूप से रह रहे किसी व्यक्ति के परिवार के सदस्यों को दिए जाने वाले ग्रीन कार्ड पर वार्षिक सीमा पूरी दुनिया के लिए 2.26 लाख है जबकि रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की वार्षिक सीमा 1.40 लाख है। उन्होंने वीजा तथा दूतावास संबंधी मुद्दों पर ऑनलाइन आयोजित एक कार्यक्रम में भारतीय-अमेरिकियों से कहा कि परिवार के सदस्यों को दिए जाने वाले और रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड पर हर देश के लिए वार्षिक 7 फीसदी का कोटा है। रैंड ने एक सवाल के जवाब में कहा, यही कारण है कि भारत, चीन, मेक्सिको व फिलीपीन के लोगों को अन्य देशों के लोगों के मुकाबले लंबा इंतजार करना पड़ता है।
भारतीयों को हर साल 7 से 8 हजार ग्रीन कार्ड
भारत के नागरिकों को हर साल करीब 7,000 से 8,000 रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड जारी किए जाते हैं। इनमें प्राथमिक आवेदकों के परिवार पर निर्भर लोग भी शामिल रहते हैं। भारत के करीब 2,000 एच-1बी वीजा आवेदकों को हर साल ग्रीन कार्ड मिलते हैं। एच-1बी वीजा एक गैर आव्रजक वीजा है जो अमेरिकी कंपनियों को ऐसे पेशों में विदेशी कामगारों को नियुक्त करने की मंजूरी देता है जिनमें सैद्धांतिक या तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत होती है।