डॉ. पीके मिश्रा
- फोटो : एक्स@ANI
प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पीके मिश्रा ने बुधवार को जिनेवा में आयोजित ग्लोबल प्लेटफॉर्म फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन (जीपीडीआरआर) 2025 सम्मेलन में भारत का बयान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारत मानता है कि आपदा जोखिम को कम करने (डीआरआर) के लिए एक मजबूत और उत्तरदायी वित्तीय ढांचा बेहद जरूरी है, जो किसी भी देश की मजबूती और तैयारियों की नींव होता है।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि भारत में आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की मदद से राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर तक पूर्व निर्धारित और नियम आधारित धन आवंटन की व्यवस्था है। इससे आपदा फंडिंग केवल एक प्रतिक्रियात्मक उपाय नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और पूर्वानुमान योग्य प्रणाली बन चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के दृष्टिकोण की नींव चार अहम सिद्धांतों पर टिकी है। हालांकि उन्होंने भाषण में उनके नाम स्पष्ट रूप से नहीं गिनाए।
ये भी पढ़ें:- CJI: 'हस्तक्षेप करने वाले चाचा से मदद करने वाले भाई की भूमिका में भारत'; सीजेआई गवई ने मध्यस्थता पर दिया जोर
डॉ मिश्रा ने वैश्विक सहयोग पर दिया जोर
इसके साथ ही डॉ. मिश्रा ने वैश्विक सहयोग पर जोर देते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षीय वित्तीय संस्थाओं के समर्थन से एक वैश्विक सुविधा बनाई जानी चाहिए, जो कि शुरुआती फंडिंग देने सके, तकनीकी सहायता प्रदान करे और ज्ञान साझा करने के लिए एक मंच भी उपलब्ध कराए।
ये भी पढ़ें:- Council of Ministers: पीएम ने ऑपरेशन सिंदूर में स्वदेशी हथियारों की ताकत को बताया अहम, 'मेक इन इंडिया' पर जोर
उन्होंने कहा कि इस तरह की वैश्विक साझेदारी से दुनिया भर में आपदा प्रबंधन की क्षमता को मजबूती मिलेगी। बता दें जीपीडीआरआर 2025 आपदा जोखिम को कम करने से जुड़े वैश्विक प्रयासों को साझा करने और सहयोग बढ़ाने का एक बड़ा मंच है, जिसमें दुनिया के कई देश हिस्सा ले रहे हैं।