श्रीलंका के संसद की स्पीकर महिंदा यापा अबेवर्धने ने मंगलवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय बैंक विधेयक को असंवैधानिक करार नहीं किया है। अधिकारियों और सरकार के प्रभाव में आए बिना सेंट्रल बैंक को ताकत देना ही विधेयक का उद्देश्य है। स्पीकर ने मंगलवार को संसद को बताया कि बिल श्रीलंका के संविधान के अनुसार ही है। इसे संशोधनों के साथ अपनाने के लिए केवल बहुमत की जरूरत है।
यह है नया विधेयक लाने का कारण
सुप्रीम कोर्ट ने बिल की संवैधानिकता के खिलाफ सेंट्रल बैंक के एम्प्लॉइज यूनियन की सात याचिकाओं पर विचार किया। सेंट्रल बैंक के गवर्नर नंदलाल वीरसिंघे ने पिछले महीने कहा था कि नीतियां बनाने और उसे निर्धारित करने में सेंट्रल बैंक थोड़ा कमजोर हैं। इसी कारण से श्रीलंका दिवालिया घोषित हो गया था। वीरसिंघे ने कहा कि 2020, 2021 और 2022 में ब्याज और एक्सचेंट रेट की दरें सेंट्रल बैंक से बिना सलाह तय की गई थीं। जो राजनीतिक प्रभाव से निर्धारित हुई थी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी डॉलर के लिए एक्सचेंज रेट 203 रुपए तय की गई, जिससे बैंक के भंडार को अधिक नुकसान हुआ।
गवर्नर ने की मांग
वीरसिंघे ने कहा कि पॉलिसियों के ब्याज दर और एक्सचेंज रेटों को निर्धारित करने के लिए सेंट्रल बैंक को स्वतंत्र किया जाना चाहिए। ट्रेजरी सचिव को विधेयक के तहत 11 सदस्यीय मौद्रिक नीति बोर्ड और 7 सदस्यीय गवर्निंग बोर्ड से बाहर रखा गया है।
आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड ने पिछले महीने ईएफएफ के तहत श्रीलंका को 2.286 बिलियन एसडीआर (लगभग 3 बिलियन अमेरिकी डॉलर) की राशि के साथ 48 महीने की व्यवस्था को मंजूरी दी। श्रीलंका के इतिहास में पहली बार पिछले साल मई में 51 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के लोन के कारण खुद को दिवालिया घोषित किया था।