भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कहा है कि किसी खास समुदाय को निशाना बनाकर राज्य प्रायोजित आतंकवाद से अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव बढ़ता है और वे हाशिये पर जाने को मजबूर हो जाते हैं। भारत ने विश्व निकाय के सदस्य देशों और एजेंसियों से किसी भी आधार पर आतंकवाद को उचित ठहराने का मौका नहीं देने का आव्हान किया है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने कहा, आतंकवाद का कहर हमारे समाज में भेदभाव का बड़ा कारण बना है। राज्य प्रायोजित आतंक से खास समुदाय को निशाना बनाने पर अल्पसंख्यकों के खिलाफ यह भेदभाव बढ़ता है और वे समाज में हाशिये पर जाने को मजबूर होते हैं।
उन्होंने ‘नस्लवाद, किसी धर्म के खिलाफ नफरत की भावना और भेदभाव खत्म करने’ के लिए आयोजित एक बैठक में बोलते हुए उन्होंने यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा, भारत सभी देशों से ऐसे आतंकी कृत्यों पर लगाम लगाने का आव्हान करता है।
तिरुमूर्ति ने कहा, संयुक्त राष्ट्र को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है कि सीमित स्थान पर नस्लवाद और भेदभाव को रोकने के लिए अभियान ना चलाया जाए बल्कि जो भी इससे प्रभावित हैं, उनके समाधान के लिए काम करना चाहिए।
यमन में संघर्ष अंत न दिखना निराशाजनक
भारत ने कहा है कि यमन में दशक भर से जारी संघर्ष का कोई अंत नहीं दिखना निराशाजनक है। भारत ने जोर दिया कि आगे बढ़ने का एकमात्र तरीका ऐसा शांतिपूर्ण राजनीतिक समझौता है जो सभी हितधारकों की वैध चिंताओं को ध्यान में रखे। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने चिंता जताते हुए कहा कि यमन में आर्थिक, सुरक्षा और राजनीतिक चुनौतियां बढ़ी हैं जिससे वहां मानवीय सहायता की काफी जरूरत है।