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10,000 एफपीओ बनाने के लिए 400 जिलों में निगरानी व समन्वय समितियों का गठन

Wed, 11 Nov 2020 01:58 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
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कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर - फोटो : ANI
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केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने कृषक उत्पादक संगठन - एफपीओ स्कीम की समीक्षा की। इससे संगठित किसानों को कई सुविधाएं मिल सकेंगी। देश के हर ब्लाक में एफपीओ का गठन किया जाना है। इसके लिए मंत्रालय  6800 करोड़ रुपये खर्च करके देश में 10,000 नए कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) गठित करेगा।

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 इसके तहत  35 राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों ने  राज्य स्तरीय समंवय समिति बना ली है, वहीं 400 जिलों में भी निगरानी एवं समन्वय समितियां (डीएमसी) का गठन हो गया है। इसके अलावा अभी तक 411 उत्पाद क्लस्टरों का प्रमाणन कर दिया गया है।


समीक्षा बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास, पंचायत राज तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा स्कीम की समीक्षा की गई। इस बैठक में  तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जोर किसानों को संगठित करने पर है, ताकि उन्हें ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं मुहैया कराई जा सकें।
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हरेक ब्लाक में कम से कम एक एफपीओ बनाया जाएगा। भारत सरकार ने देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अनेक कदम उठाए है, इसी के तहत कृषि क्षेत्र को भी आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। 10 हजार नए एफपीओ बनाने की योजना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे भारतीय कृषि को पूर्ण रूप से सक्षम एवं लाभवर्धक बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।

बैठक में राज्य मंत्री परषोत्तम रूपाला भी मौजूद थे, जिन्होंने अधिकारियों से पूर्ण समन्वय व पारदर्शिता से कार्य करने को कहा। बैठक में बताया गया कि देश में अभी तक 6,455 एफपीओ विभिन्न स्कीमों में बनाए जा चुके है। इनमें शीर्ष 5 राज्य- महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश हैं।

 केंद्रीय क्षेत्र की 10 हजार नए एफपीओ बनाने की स्कीम में कार्यांवयन एजेंसियों के समग्र समंवय व आवंटन कलस्टरों हेतु परियोजना प्रबंधन सलाहकार और निधि मंजूरी समिति की 4 बैठके हो चुकी हैं।

योजना में स्माल फार्मर्स एग्रीबिजनेस कंर्सोटियम (एसएफएसी), राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के अलावा भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी संघ विपणन संघ (नेफेड), वाटरशेड डेवलपमेंट विभाग (डब्ल्यूडीडी)-कर्नाटक, एसएफएसी-हरियाणा, एसएफएसी-तमिलनाडु, नार्थ-ईस्टर्न रीजनल एग्रीकल्चरल मार्केटिंग कार्पोरेशन (एनईआरएएमसी), नेशनल रूरल लाइवलीहुड मिशन (एनआरएलएम), इंटीग्रेटेड न्यूट्रिएन्ट मैनेजमेट (आईएनएम) डिवीजन व तिलहन डिवीजन को कार्यान्वयन एजेंसियों के रूप में मंजूरी दी गई है।

इनके द्वारा नियुक्त क्लस्टर आधारित व्यावसायिक संगठनों (सीबीबी के विशेषज्ञ एफपीओ को विकसित करेंगे। एफपीओ के लिए क्त्रस्ेडिट गारंटी फंड बनाने की कार्यवाही भी प्रारंभ हो गई है। एजेंसियों को मंत्रालय द्वारा फंड जारी किया जा रहा है। वर्ष 2020-21 के दौरान एजेंसियों को 2,200 एफपीओ के गठन का लक्ष्य दिया गया है। एजेंसियों ने क्लस्टरों की पहचान भी कर ली है।

वर्ष 2020-21 के लिए एजेंसियों ने एफपीओ के गठन हेतु अभी तक 1,581 ब्लॉक चिन्हित कर लिए हैं। एसएफएसी ने 28 राज्य, केंद्रशासित प्रदेशों के 238 जिलों में 450 क्लस्टरों को चिन्हित किया है, जिनमें 84 आकांक्षी जिलों में एवं 9 ट्राइबल जिले  हैं। इसके अलावा नाबार्ड ने 83 जिलों में 95 क्लस्टरों को चिन्हित किया, जिनमें से 21 आकांक्षी जिलों में है।

इन सभी में एफपीओं के गठन के लिए प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण की कवायद भी तेजी से चल रही है। बैंकर्स इंस्टीट्यूट आफ रूरल डेवलपमेंट (बीआईआरडी), लखनऊ को लक्ष्मण राव इमानदार नेशनल एकेडमी फार कोआपरेटिव रिसर्च एंड डेवलपमेंट (एलआईएनएसी), गुरुग्राम के साथ नोडल संस्थान के रूप में चिन्हित किया गया है। प्रेजेंटेशन, वीडियो प्ले व एमओओसी के माध्यम से प्रशिक्षण एवं ई-मॉड्यूल को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

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