मुकदमेबाजी का सामना कर रहीं कंपनियों को अमेरिकी कानून के मुताबिक दस्तावेजों को सुरक्षित रखना जरूरी है, लेकिन गूगल ने अपने इंस्टेंट मैसेजिंग को इस कानूनी रोक से बाहर रखा। साथ ही जो कर्मचारी मुकदमेबाजी की प्रक्रिया का हिस्सा हैं, उन्हें भी अपनी चैट हिस्ट्री को चालू रखना था, लेकिन बहुत कम कर्मचारियों ने ऐसा किया।
दिग्गज तकनीकी कंपनी गूगल इन दिनों अमेरिका के अविश्वास कानून के चलते परेशानियों में घिरी हुई है। अब एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गूगल भले ही दुनिया भर की जानकारी अपने पास जमा रखती है, लेकिन खुद उसने अपने कर्मचारियों के संचार पर कई पाबंदियां लगाई हुईं थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गूगल ने अपने कर्मचारियों को अपने आंतरिक संचार के संदेश डिलीट करने और आंतरिक संचार के दौरान कुछ विशेष शब्दों के इस्तेमाल पर रोक लगाई हुई थी।
विज्ञापन
कंपनी पर लगे हैं ये आरोप
रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी साल 2008 से ही ऐसी रणनीतियां अपना रही है। दरअसल उस दौरान गूगल को अपनी तत्कालीन प्रतिद्वंदी कंपनी याहू के साथ विज्ञापन सौदे को लेकर अविश्वास जांच का सामना करना पड़ा था और उसने अपने कर्मचारियों को एक गोपनीय निर्देश भेजा था। इस निर्देश में गूगल ने अपने कर्मचारियों को किसी भी तरह की अटकलों और हंसी मजाक से बचने को कहा था और अहम मुद्दों पर एक दूसरे को संदेश भेजते हुए सावधानी बरतने का निर्देश दिया था। साथ ही सभी तथ्यों की जानकारी करने के बाद ही कोई टिप्पणी करने को कहा गया था।
मुकदमेबाजी का सामना कर रहीं कंपनियों को अमेरिकी कानून के मुताबिक दस्तावेजों को सुरक्षित रखना जरूरी है, लेकिन गूगल ने अपने इंस्टेंट मैसेजिंग को इस कानूनी रोक से बाहर रखा। साथ ही जो कर्मचारी मुकदमेबाजी की प्रक्रिया का हिस्सा हैं, उन्हें भी अपनी चैट हिस्ट्री को चालू रखना था, लेकिन बहुत कम कर्मचारियों ने ऐसा किया। यही वजह रही कि अविश्वास कानून के तहत गूगल के खिलाफ चल रही सुनवाई के दौरान जजों ने कंपनी को आंतरिक संचार के ऐसे लापरवाही भरे व्यवहार के लिए फटकार लगाई है। जजों ने कहा कि गूगल के भीतर प्रासंगिक सबूतों को दबाने की संस्कृति है और यह न्याय और निष्पक्ष प्रशासन पर सीधा हमला है।
विज्ञापन
अविश्वास कानून में फंसी है गूगल
अमेरिका का न्याय विभाग गूगल के खिलाफ अविश्वास कानून के तहत सुनवाई कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गूगल पर आरोप है कि उसने बाजार में अपना एकाधिकार स्थापित कर लिया है और कंपनी के इस एकाधिकार को खत्म करने के लिए न्याय विभाग गूगल को अपना सर्च इंजन गूगल क्रोम बेचने के लिए मजबूर कर सकता है। अमेरिकी न्याय विभाग ने गूगल के एकाधिकार को अविश्वास कानून के प्रावधानों का उल्लंघन माना है।
तकनीकी कंपनी गूगल पर आरोप है कि उसने ऑनलाइन सर्च बाजार में अवैध रूप से अपना प्रभुत्व स्थापित किया और उसे बनाए रखा। दुनिया के 90 फीसदी से ज्यादा स्मार्टफोन में गूगल का सर्च इंजन है। न्याय विभाग की कार्रवाई के चलते गूगल को अगर अपना सर्च इंजन क्रोम बेचना पड़ता है तो यह उसके लिए आर्थिक और रणनीतिक रूप से बड़ा झटका साबित होगा।