दुनिया में अगले कुछ दशकों में करीब 124 लाख करोड़ डॉलर की संपत्ति अगली पीढ़ी को हस्तांतरित होने का अनुमान है। इसमें से 2048 तक लगभग 52 लाख करोड़ डॉलर महिलाओं के पास आ सकते हैं। लेकिन क्या बढ़ती संपत्ति महिलाओं को अपने पैसों पर फैसले लेने की पूरी आजादी भी दिला पाएगी?
दुनिया में अगले कुछ दशकों में संपत्ति का बड़ा हस्तांतरण होने जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी हिस्सेदार महिलाओं के बनने की संभावना है। अनुमान है कि दुनिया में करीब 124 लाख करोड़ डॉलर की संपत्ति अगली पीढ़ी को हस्तांतरित होगी। इसमें से 2048 तक लगभग 52 लाख करोड़ डॉलर महिलाओं के पास आ सकते हैं। यह बदलाव महिलाओं की आर्थिक ताकत बढ़ाने के साथ निवेश की दुनिया में उनकी भूमिका भी बदल सकता है।
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हालांकि, संपत्ति का महिलाओं के नाम होना और उस पर वित्तीय फैसले लेने की पूरी क्षमता होना दो अलग बातें हैं। एक अनुमान के मुताबिक, महिलाओं की 53% संपत्ति का प्रबंधन पेशेवर वित्तीय सलाहकार नहीं करते। पुरुषों के मामले में यह आंकड़ा 45% है। यानी महिलाओं के पास संपत्ति बढ़ने की संभावना के बावजूद, उसके निवेश और प्रबंधन के लिए पेशेवर सलाह तक उनकी पहुंच एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
असली बदलाव संपत्ति के साथ नियंत्रण का भी
आने वाले वर्षों में महिलाओं की आर्थिक ताकत का आकलन केवल इस आधार पर नहीं होगा कि उनके नाम कितनी संपत्ति आई। यह भी देखना होगा कि वे उस संपत्ति के इस्तेमाल, निवेश और भविष्य की वित्तीय योजना पर कितने स्वतंत्र फैसले ले पाती हैं। संपत्ति का हस्तांतरण महिलाओं के लिए बड़ा अवसर है, लेकिन उस अवसर को आर्थिक स्वतंत्रता में बदलने के लिए वित्तीय जानकारी, उचित सलाह और फैसले लेने की क्षमता भी जरूरी होगी।
एआई भी खोल सकता है नए अवसर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से जुड़े अवसर भी महिलाओं की कमाई और आर्थिक भागीदारी को प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन बढ़ती कमाई या विरासत में मिली संपत्ति अपने आप दीर्घकालीन आर्थिक सुरक्षा की गारंटी नहीं देती। इसके लिए निवेश के विकल्पों की समझ, वित्तीय सलाह और अपने पैसों से जुड़े फैसलों में सक्रिय भागीदारी अहम होगी।
मैकिन्से के अनुमान के मुताबिक, महिलाओं के पास आने वाली संपत्ति का आकार आने वाले वर्षों में काफी बड़ा हो सकता है। ऐसे में वित्तीय संस्थानों के लिए भी महिलाओं की जरूरतों को समझना और उनके अनुरूप सलाह व निवेश सेवाएं उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होगा।