गहराते वैश्विक कर्ज संकट के बीच संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों से अपील की है कि वे ब्याज दर बढ़ाने की अपनी नीति को तुरंत रोक दें। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूनाइटेड नेशंस कॉन्फ्रेंस ऑन ट्रेड एंड डेवलपमेंट (अंकटाड) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि ब्याज दर बढ़ाने की नीति का परिणाम गंभीर आर्थिक मंदी के रूप में सामने आ सकता है।
इसके ठीक पहले डेट जस्टिस (ऋण न्याय) नाम की एक गैर-सरकारी संस्था ने अपनी एक रिपोर्ट कहा कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी के कारण कर्ज संकट गहराता जा रहा है। इस संस्था ने ये रिपोर्ट विश्व बैंक की अगले दस अकतूबर से होने वाली सालाना बैठक के मौके पर जारी की है।
डेट जस्टिस ने कहा है कि ब्याज दर बढ़ने के कारण गरीब देशों को अपने विदेशी ऋण पर ब्याज के रूप में पहले ज्यादा रकम का भुगतान करना पड़ रहा है। संस्था की रिपोर्ट में ध्यान दिलाया गया है कि ब्याज दर धनी और गरीब दोनों श्रेणी में आने वाले देशों में बढ़ रही है। इस ट्रेंड का आरंभ 2022 की शुरुआत से हुआ। इस ट्रेंड की गरीब देशों को बहुत महंगी कीमत चुकानी पड़ रही है।
डेट जस्टिस ने 27 देशों का आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर कहा है कि उन्हें अब पहले से ब्याज के रूप में अधिक रकम चुकानी पड़ रही है। ऐसे देशों के लिए नया ऋण लेना बहुत मुश्किल हो गया है। इस साल के आरंभ में जहां ऐसे देशों को औसतन 10.2 फीसदी की ब्याज दर पर कर्ज मिल जाता था, अब ये दर लगभग 46 फीसदी तक पहुंच चुकी है। इसकी वजह से इथियोपिया और जाम्बिया की ऋण भुगतान लागत अब 25 फीसदी बढ़ चुकी है।
विश्व बैंक की 10 अक्तूबर से शुरू होने वाली वार्षिक बैठक में इस बार कर्ज राहत का मुद्दा प्रमुखता से उठेगा। डेट जस्टिस के कार्यकारी निदेशक हेइदी चाउ ने ब्रिटिश अखबार द गार्जियन से कहा- ‘बहुत से देशों को कर्ज संकट से निपटने की कोशिश में जरूरी खर्च घटाना पड़ रहा है। बढ़ रहीं ब्याज दरों के कारण पहले से ही खतरनाक स्थिति में पहुंच चुके इन देशों की हालत बदतर हो गई है। पाकिस्तान जैसे देश जलवायु परिवर्तन की मार के कारण भी भारी दिक्कत में हैँ। हम ऐसी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, जिससे जरूरतमंद देशों के कर्ज तुरंत माफ किए जाएं- खास कर उन कर्जो को माफ किया जाए, जो इन देशों ने निजी कर्जदाताओं से ऊंची ब्याज दर पर लिए हैं।’
अंकटाड ने भी इसी समस्या की तरफ दुनिया का ध्यान खींचा है। उसने चेतावनी दी है कि ऊंची ब्याज दरों के कारण विकासशील देश ऐसे दुश्चक्र में फंस सकते हैं, जिनसे कोरोना महामारी के दौरान आए वित्तीय संकट से भी ज्यादा नुकसान होगा। अंकटाड ने कहा है- ‘अमेरिका में इस वर्ष ब्याज दर में हुई बढ़ोतरी से विकासशील देशों (चीन के अलावा) की भावी आय में अनुमानतः 360 बिलियन डॉलर की कटौती हो जाएगी। यह भविष्य में आने वाली और भी बड़ी मुसीबत का संकेत है।’