संयुक्त राष्ट्र उपमहासचिव आमिना जे. मोहम्मद ने 23 सितंबर को जलवायु शिखर वार्ता के लिए न्यूयॉर्क में विश्व नेताओं के आगमन से पहले एक रिपोर्ट जारी की है जो बताती है कि जलवायु परिवर्तन की गति कम करने के लिए दुनिया किस तरह सार्थक और त्वरित कदम उठा सकती है। बताया गया है कि इस रिपोर्ट से यह समझने में मदद मिलेगी कि जलवायु शिखर वार्ता में नेता ठोस समाधान साथ लाए हैं या फिर सिर्फ भाषणों के साथ यहां एकत्र हुए हैं।
वर्ष 2015 में पेरिस समझौते के बाद से ही विश्व भर में जलवायु परिवर्तन से मुकाबले के प्रयास तेज़ हो रहे हैं जिनके तहत योजनाएं, नीतियां और अनुमान समझौते के सुझावों के अनुरूप ढाला जा रहे हैं।
यूएनडीपी के प्रमुख एखिम श्टाइनर ने बताया कि हमें बातें कम करने और काम ज्यादा करने की आवश्यकता है। “विश्व की आधी आबादी अपनी अर्थव्यवस्थाओं की कायापलट कर उन्हें कम कार्बन उत्सर्जन पर आधारित बनाने में जुटी है।”
जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र संस्था (UNFCCC) के अनुसार जरूरी समर्थन के साथ शहर, क्षेत्र और व्यापारिक प्रतिष्ठान, देशों को उनकी महत्वाकांक्षा बढ़ाने, कार्बन उत्सर्जन कम करने के संकल्प पूरा करने में मदद कर सकते हैं।
हालांकि रिपोर्ट में माना गया है कि तमाम प्रयासों के बावजूद अब भी और ज्यादा कदम उठाए जाने की आवश्यकता है क्योंकि जलवायु परिवर्तन से लड़ाई की दौड़ में अभी दुनिया पिछड़ रही है और स्थिति में बदलाव लाने के लिए सभी वर्गों की ओर से समन्वित प्रयास करना होगा।
यूएनडीपी ने अपने समर्थन के संकल्प का स्तर बढ़ाया है जिसके जरिए वर्ष 2020 तक 100 से ज्यादा देशों को जलवायु कार्रवाई योजनाओं को व्यापक बनाने में मदद मुहैया कराई जाएगी। रिपोर्ट जारी करने के दौरान ‘मिशन 1.5’ की भी एक झलक दिखाई गई जो इंटरएक्टिव डिजिटल मीडिया का अनुभव है जो सुनिश्चित करेगा कि जलवायु कार्रवाई में नागरिकों की आवाज भी सुनी जाए।