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COP29: जलवायु परिवर्तन से लड़ने को 2022 में वैश्विक स्तर पर जुटे 1.5 ट्रिलियन डॉलर, जानें 2030 के लिए क्या तय

Fri, 01 Nov 2024 08:02 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

वैश्विक थिंक टैंक क्लाइमेट पॉलिसी इनीशिएटिव (सीपीआई) द्वारा प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु के लिए यह वित्तपोषण फिलहाल दुनियाभर की जीडीपी का सिर्फ एक फीसदी ही है। यह जरूरी स्तर से काफी कम है।
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जलवायु परिवर्तन। - फोटो : ani
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विस्तार
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जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर कोशिशें जारी हैं। कई देश और संस्थाएं इसके बुरे असर को कम करने के लिए वित्तीय तरीके आजमा रही हैं। इसी कड़ी में 2022 में दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए 1.5 ट्रिलियन डॉलर जुटाए गए। यह आंकड़ा 2018 से 2022 के बीच लगभग दोगुना हो चुका है। 
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हालांकि, 'ग्लोबल लैंडस्केप ऑफ क्लाइमेट फाइनेंस 2024: इनसाइट्स फॉर कॉप29' रिपोर्ट में ये साफ जिक्र है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए 2030 तक 1.5 ट्रिलियन डॉलर की राशि काफी नहीं होगी और इसे कम से कम पांच गुना तक पहुंचाना होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि धरती को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक गर्म होने से रोकने में यह सबसे जरूरी चीज होगी। 

वैश्विक थिंक टैंक क्लाइमेट पॉलिसी इनीशिएटिव (सीपीआई) द्वारा प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु के लिए यह वित्तपोषण फिलहाल दुनियाभर की जीडीपी का सिर्फ एक फीसदी ही है। यह जरूरी स्तर से काफी कम है। उभर रहे बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को 2030 तक तक अपने जलवायु लक्ष्य हासिल करने के लिए जीडीपी के 6.5 फीसदी तक की जरूरत पड़ सकती है।
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सीपीआई वैश्विक प्रबंध निदेशक बारबरा बकनर ने कहा कि जलवायु वित्तपोषण में कुछ बढ़ोतरी दर्ज हुई है। लेकिन फंडिंग का अंतर बहुत बड़ा है और देशों को साथ आकर और ज्यादा जुनूनी और साथ आकर प्रभावी ढंग से इस पर विचार करना होगा। उन्होंने कहा कि सीपीआई का हालिया डाटा यह सिद्ध करता है कि जलवायु के मामले में सभी स्तरों- घरेलू, अंतरराष्ट्रीय और सभी सेक्टर्स की तरफ से निवेश बेहद जरूरी है, ताकि जलवायु के लक्ष्यों तक पहुंचा जा सके।
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