नेपाल में तबाही का मंजर
- फोटो : पीटीआई
इस तबाही में घरों, गाड़ियों, पुलों और बुनियादी ढांचे और कई परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा। यह जानकारी अधिकारियों ने दी है। स्थानीय मीडिया के अनुसार बाढ़ में हजारों लोग अभी भी लापता हैं, जिसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।
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उत्तरी रसुवा में एक सीमा चौकी पर तैनात नेपाल के सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) के चार जवान अचानक आई बाढ़ के कारण लापता हो गए हैं। इसके अलावा, स्थानीय मीडिया के अनुसार, रसुवा सीमा शुल्क कार्यालय के 14 के अलावा, नेपाल पुलिस के 32 जवान भी संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं। नेपाल के स्वतंत्र बिजली उत्पादक संघ के अनुसार, बाढ़ से 15 हाइड्रो पावर परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। इनमें से 10 चालू हैं और पांच निर्माणाधीन हैं।
सबसे ज्यादा कौन सा क्षेत्र प्रभावित हुआ?
नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने की सूचना स्थानीय समयानुसार सुबह करीब नौ बजे मिली। अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ का पानी तिब्बत की ओर से आया प्रतीत होता है। सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में तिमुरे और स्याब्रुबेसी की सीमावर्ती बस्तियां शामिल हैं।
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अधिकारियों ने अभी तक नुकसान के बारे में कोई जानकारी नही दी है, क्योंकि आकलन दल अभी भी प्रभावित क्षेत्रों से जानकारी एकत्र कर रहे हैं।
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रसुवा प्रशासन ने क्या कहा?
रसुवा जिले के प्रशासन नरेंद्र परियार ने रॉयटर्स को बताया,’ हमें गांवों और बुनियादी ढांचा परियोजना स्थलों के बह जाने की खबरें मिली हैं। उन्होंने आगे कहा, ‘भारी जानमाल का नुकसान हो सकता है। लेकिन मैं अभी निश्चित रूप से कुछ नहीं कह सकता।’
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नेपाल सेना ने क्या बताया?
नेपाल सेना ने कहा कि बाढ़ के कारण तिमुरे और स्याब्रुबेसी क्षेत्र में व्यापक तबाही हुई है, जिसमें वाहन, व्यावसायिक सामान और अन्य संपत्ति पानी में बह गई है। रसुआ के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना ने बताया कि सीमा शुल्क परिसर में रखे कई वाहन और सामान बह गए। हाल ही में निर्मित एक पुल भी नष्ट हो गया। काठमांडू से लगभग 125 किलोमीटर दूर स्थित और तिब्बत से सटे पहाड़ी जिले रसुवा की आबादी लगभग 50,000 है।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन ने क्या चेतावनी दी?
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण ने रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन और गोरखा में नदी तटों के पास रहने वाले निवासियों को सतर्क रहने और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर चले जाने की चेतावनी दी है।
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प्रधानमंत्री की उच्चस्तरीय बैठक और निर्देश
बाढ़ की हालात को देखते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने सिंह दरबार में एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। इस बैठक में रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा और चितवन के संघीय सांसदों के साथ बचाव और राहत कार्यों पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रधानमंत्री ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन राष्ट्रीय परिषद की बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि निचले तटीय इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जाए और विस्थापितों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए।
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WHO की मदद और चिकित्सा व्यवस्था
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बाढ़ पीड़ितों के लिए आपातकालीन सहायता की घोषणा की है। स्वास्थ्य और खाद्य स्वच्छता मंत्री निशा मेहता के अनुसार, संगठन 1,000 लोगों के लिए बुनियादी दवाएं, स्वास्थ्य उपकरण और 24 वर्ग मीटर के 15 इमरजेंसी टेंट भेज रहा है। इसके अलावा, काठमांडू के बीर अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में बाढ़ पीड़ितों के लिए 100 इमरजेंसी बेड आरक्षित किए गए हैं। अब तक तीन गंभीर घायलों को एयरलिफ्ट कर काठमांडू लाया गया है।
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रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
बाढ़ की वजह में अब तक सात लोगों के मौत की पुष्टि हो चुकी है। पुलिस के अनुसार, चार शव नुवाकोट में और तीन शव धाडिंग जिले में मिले हैं। राहत और बचाव कार्य के लिए नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस की संयुक्त टीमें तैनात हैं। तलाशी अभियान में 14 हेलीकॉप्टरों को लगाया गया है, जिनकी मदद से बुधवार दोपहर तक 25 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है।