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जर्मनी: धुर दक्षिणपंथी पार्टी सत्ता के करीब, नाजी दौर के बाद पहली बार बना सकती है सरकार

Mon, 07 Sep 2026 04:45 PM IST
नितिन गौतम पीटीआई, बर्लिन

सार

जर्मनी में चरमपंथी मानी जाने वाली पार्टी एएफडी ने एक राज्य के चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल की है। हालांकि अभी उसे सरकार बनाने के लिए कुछ विधायकों के समर्थन की जरूरत है। 
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जर्मनी में एएफडी पार्टी की जीत। - फोटो : एक्स/@Alice_Weidel
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विस्तार
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जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के सामने सोमवार को मुश्किल स्थिति पैदा हो गई। उनकी पार्टी को क्षेत्रीय चुनाव में धुर दक्षिणपंथी पार्टी ऑल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) ने बुरी तरह हरा दिया। इस चुनाव के चलते नाजी दौर के बाद पहली बार, जर्मनी के किसी राज्य में कट्टर दक्षिणपंथी पार्टी की सरकार बनने का रास्ता खुल सकता है। जर्मनी की खुफिया एजेंसी द्वारा चरमपंथी संगठन के रूप में वर्गीकृत एएफडी देश के पूर्वी राज्य सैक्सोनी-आनहाल्ट में रविवार को हुए चुनाव में बहुमत हासिल करने से कुछ ही अंतर से चूक गई।
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उलरिख जीरमुंड मुख्यमंत्री बनने की रेस में
हालांकि, अब गठबंधन को लेकर बातचीत होनी है। राज्य के मुख्यमंत्री पद के लिए एएफडी के उम्मीदवार उलरिख जीगमुंड रेस में हैं। जीगमुंड ने रविवार देर रात कहा, 'हम स्पष्ट रूप से चाहते हैं कि चुनाव के बाद मतदाताओं को वही मिले, जिसके लिए उन्होंने मतदान किया है। 44 प्रतिशत से अधिक लोगों ने राजनीतिक बदलाव के लिए मतदान किया है और चुनाव के बाद इसे लागू किया जाना चाहिए।'

इस चुनावी नतीजे से चांसलर मर्ज कमजोर हुए हैं और उनकी पार्टी की ऐतिहासिक हार की कुछ जिम्मेदारी उन पर भी आएगी। उनकी मध्य-दक्षिणपंथी क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) पिछले 24 वर्षों से इस राज्य में सत्ता में थी। चुनाव में सीडीयू का वोट प्रतिशत करीब आधा रह गया, जबकि एएफडी का मत प्रतिशत दोगुने से अधिक हो गया।
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इस नतीजे से इस महीने के अंत में होने वाले अन्य राज्यों के चुनावों में भी एएफडी का उत्साह बढ़ सकता है। रूस समर्थक रुख और प्रवासन विरोधी कट्टर नीतियों के लिए जानी जाने वाली एएफडी जर्मनी की संसद में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है। पूर्व में साम्यवादी शासन के अधीन रहे और अपेक्षाकृत कम समृद्ध पूर्वी हिस्से में इसका प्रभाव सबसे अधिक है। सैक्सोनी-आनहाल्ट भी इसी क्षेत्र में है।

एएफडी को सत्ता से दूर रखना होगा मुश्किल
एएफडी को सत्ता से बाहर रखने के लिए अन्य सभी पार्टियों—सीडीयू, सोशल डेमोक्रेट्स, ग्रीन्स, लेफ्ट पार्टी और बीएसडब्लू को मिलकर सरकार बनानी होगी। हालांकि, पांच दलों का गठबंधन बेहद असामान्य और काफी जटिल होगा और इसकी संभावना बहुत कम मानी जा रही है। यह भी संभव है कि अन्य दलों के नवनिर्वाचित विधायक एएफडी में शामिल हो जाएं। बहुमत हासिल कर सरकार बनाने के लिए पार्टी को केवल तीन और विधायकों की जरूरत है। जर्मनी के नाजी अतीत के कारण यहां कट्टर दक्षिणपंथी आंदोलनों पर हमेशा कड़ी नजर रही है।

मस्क ने एएफडी को दी बधाई
अरबपति एलन मस्क ने अपने ऑनलाइन मंच एक्स पर दक्षिणपंथी पार्टी को चुनावी जीत की बधाई देते हुए लिखा, 'बहुत अच्छा!' जीगमुंड ने तत्काल उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और अंग्रेजी में जवाब दिया, 'अगर हम यहां जिम्मेदारी संभालते हैं, तो मैं मजबूत और रचनात्मक सहयोग के अवसर का बहुत स्वागत करूंगा। जर्मनी एक बार फिर निवेश के लायक जगह बन जाएगा। सैक्सोनी-आनहाल्ट से सादर!'

अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी किया पोस्ट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर चुनाव के अनुमान का स्क्रीनशॉट बिना किसी टिप्पणी के पोस्ट किया। हालांकि, हर कोई मस्क की तरह उत्साहित नहीं था। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने सोमवार सुबह एक्स पर लिखा, 'पोलैंड में केवल मूर्ख या गद्दार ही जर्मनी में एएफडी की जीत पर खुशी मना सकते हैं।'

प्रतिद्वंदी पार्टियों से बहुत आगे रही एएफडी
एएफडी को 43.8 प्रतिशत वोट मिले, जो पांच साल पहले इस बर्लिन के पश्चिम में स्थित क्षेत्र में मिले उसके मत प्रतिशत से दोगुने से भी अधिक हैं। यह मर्ज की पार्टी से काफी आगे रही, जिसे 17.2 प्रतिशत वोट मिले। सीडीयू का समर्थन करीब आधा रह गया और उसे 15 सीटें मिलीं। मध्य-वाम सोशल डेमोक्रेट्स को 9.3 प्रतिशत, ग्रीन्स को 8.9 प्रतिशत और लेफ्ट पार्टी को 8.6 प्रतिशत वोट मिले। इन तीनों दलों को आठ-आठ सीटें मिलीं।
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