डाटा सुरक्षा पर डीपसीक अमेरिका व यूरोप में भी जांच के दायरे में है। इटली ने इस वर्ष शुरु में अपने एप स्टोर पर ब्लॉक कर दिया था, जबकि नीदरलैंड ने इसे सरकारी उपकरणों पर प्रतिबंधित कर दिया है। अमेरिका में भी इस पर पाबंदी के प्रयास जारी हैं।
चीनी डीपसीक के सामने जर्मनी में दिक्कत खड़ी हो गई है। डाटा सुरक्षा चिंताओं के चलते डाटा सुरक्षा आयुक्त मीके काम्प ने यहां एपल और गूगल को कहा है कि वे देश में अपने एप स्टोर से डीपसीक को तुरंत हटाएं। काम्प ने कहा, ऐसा इसलिए क्योंकि डीपसीक उपयोगकर्ताओं के व्यक्तिगत डाटा को अवैध रूप से चीन में स्थानांतरित करता है। डीपसीक के इस कदम से उनके देश के यूजरों का डाटा असुरक्षित होने के खतरे की आशंका है।
विज्ञापन
जर्मनी के डाटा सुरक्षा आयुक्त ने कहा कि गूगल-एपल दोनों अनुरोध की तुरंत समीक्षा शुरू करें। वे यह भी तय करें कि जर्मनी में एप को ब्लॉक करना है या नहीं। डीपसीक ने इस बारे में किए अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया है। वह गूगल और एपल के कदम की प्रतीक्षा कर रहा है। डीपसीक से डाटा चीन पहुंचने के बाद जर्मनी की डाटा सुरक्षा में सेंध लग सकती है।
डीपसीक ने पूर्व में दिए निर्देश नहीं माने
काम्प ने कहा, डीपसीक जर्मनी के डाटा सुरक्षा निकाय को यह पुख्ता सबूत नहीं दे पाया है कि जर्मन उपयोगकर्ताओं का डाटा चीन में यूरोपीय संघ के स्तर पर सुरक्षित है। उन्होंने कहा, निजी डाटा के चीन तक पहुंचने पर वह उसका किसी भी अवैध तरीके से इस्तेमाल कर सकता है। डाटा आयुक्त ने कहा, हमने मई में डीपसीक से गैर-ईयू डाटा ट्रांसफर पर स्वेच्छा से अपना एप वापस लेने को कहा, लेकिन उसने हमारे अनुरोध का अनुपालन नहीं किया। इसके बाद हमने डीपसीक हटाने का निर्णय लिया है।
विज्ञापन
अमेरिका, नीदरलैंड व इटली में भी जांच जारी
डाटा सुरक्षा पर डीपसीक अमेरिका व यूरोप में भी जांच के दायरे में है। इटली ने इस वर्ष शुरु में अपने एप स्टोर पर ब्लॉक कर दिया था, जबकि नीदरलैंड ने इसे सरकारी उपकरणों पर प्रतिबंधित कर दिया है। अमेरिका में भी इस पर पाबंदी के प्रयास जारी हैं।
जुर्माने से बचने के लिए एपल ने ईयू में बदलीं एप स्टोर की नीतियां
लगातार बढ़ते जुर्मानों से बचने के लिए एपल ने यूरोपीय संघ (ईयू) में अपने एप स्टोर की नीतियों में बदलाव किया है, ताकि वह 27 देशों के डिजिटल प्रतिस्पर्धा कानूनों के मुताबिक बन सके और इन नियमों के तहत बढ़ते जुर्माने से बच सके। एपल ने यह कदम अप्रैल में 500 मिलियन यूरो (करीब 4,875 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगने के बाद उठाया है। आईफोन निर्माता कंपनी पर आरोप था कि उसने एप डेवलपर्स को सस्ते विकल्पों की जानकारी देने से रोका। अब एपल के किए बदलावों से एप डेवलपर्स यूजर्स को अन्य वेबसाइटों, एप्स या वैकल्पिक स्टोर्स के जरिये सस्ते ऑफर्स और भुगतान विकल्पों की ओर निर्देशित कर सकेंगे।