जर्मनी में सितंबर में होने वाले आम चुनाव से पहले प्रमुख प्रांतीय चुनाव रविवार (6 जून) को होगा। सैक्सॉनी-एनहाल्ट प्रांत में होने वाले मतदान से पहले जारी जनमत सर्वेक्षणों में चांसलर एंजेला मर्केल की पार्टी क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) पिछड़ती नजर आई। इसे आम चुनाव के नजरिए से सीडीयू के लिए खराब संकेत समझा जा रहा है।
ताजा चुनाव सर्वे में सीडीयू और धुर दक्षिणपंथी पार्टी ऑल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) को बराबर समर्थन मिलता दिखाया गया। उसके पहले आए एक सर्वे में तो एएफडी को सीडीयू से आगे बताया गया था। सैक्सॉनी-एनहाल्ट पूर्वी जर्मनी में स्थित राज्य है। देश के इस हिस्से में एएफडी मजबूत पार्टी रही है, लेकिन विश्लेषकों का कहना है अब उसे जो समर्थन मिलता दिख रहा है, उसकी वजह उसकी अपनी मजबूती नहीं, बल्कि सीडीयू की कमजोरी है। बताया जा रहा है कि सीडीयू की लोकप्रियता में देश भर में गिरावट आई है। इसकी वजह हाल में संघीय सरकार पर लगे भ्रष्टाचार के कई आरोपों के साथ-साथ कोरोना महामारी को संभालने में उसकी कमजोरी को माना गया। इन संकेतों से मर्केल के पसंदीदा उत्तराधिकारी और चांसलर पद के पार्टी के उम्मीदवार आर्मिन लैशेट का भविष्य संदिग्ध हो गया है।
अगर सैक्सॉनी-एनहाल्ट राज्य में एएफडी पार्टी जीत गई तो इसे आम चुनाव में लैशेट और सीडीयू की संभावनाओं के लिए तगड़ा झटका समझा जाएगा। एएफडी की बढ़ती लोकप्रियता को लेकर मतदाताओं को चेतावनी देते हुए लैशेट ने कहा कि एएफडी सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए खतरा है, जिसका लोकतंत्र में यकीन है। उन्होंने कहा, 'हम कभी नहीं चाहेंगे कि एक धुर दक्षिणपंथी पार्टी जर्मनी की किसी क्षेत्रीय संसद में सबसे मजबूत पार्टी बन जाए।'
विश्लेषकों के मुताबिक, एएफडी की सैक्सॉनी-एनहाल्ट शाखा अपनी राष्ट्रीय शाखा की तुलना में भी ज्यादा उग्र दक्षिणपंथी रुख रखती है। उसके नेता ओलिविर किर्चनर पहले पार्टी के फ्लूगेल नाम के गुट के सदस्य थे, जिसे जर्मनी की सुरक्षा एजेंसी ने उग्रवाद के आरोप में भंग कर दिया था। एएफडी की इस शाखा पर उग्रवादी गतिविधियों में शामिल रहने के आरोप लग चुके हैं।
एएफडी की बढ़ती लोकप्रियता से जर्मनी की मुख्यधारा पार्टियों में गहरी चिंता है। पिछले हफ्ते पूर्वी राज्यों के लिए संघीय सरकार के दूत मार्को वांडरविट्ज ने इस बात पर चिंता जताई थी कि कुछ पूर्वी राज्यों का जनमत लोकतांत्रिक मूल्यों की अपेक्षाओं से इतर चला गया। उन्होंने कहा कि हमें ऐसे लोगों का सामना करना पड़ रहा है, जिनका सामाजिक व्यवहार तानाशाही में इस प्रकार ढल गया था कि 30 साल तक लोकतंत्र में रहने के बावजूद वे इसके मुताबिक खुद को नहीं ढाल पाए।
बताया जाता है कि वांडरविट्ज के इस बयान की सैक्सॉनी-एनहाल्ट राज्य में कड़ी प्रतिक्रिया हुई। अनुमान है कि इससे एएफडी को और फायदा पहुंच सकता है। वांडरविट्ज का इशारा पूर्वी जर्मनी में रहे इलाकों की तरफ था, जो पहले सोवियत खेमे का हिस्सा था। एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि वांडरविट्ज के इस बयान से राज्य में काफी लोगों की भावनाएं आहत हुईं। इस बयान को उन्होंने पूर्वी जर्मनी को लेकर देश के पश्चिमी हिस्से में मौजूद पूर्वाग्रह की मिसाल माना। वहीं, एएफडी इस भावना का भी लाभ उठाने में जुटी हुई है।