अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुझाव दिया है कि फलस्तीनी लोगों को गाजा से हटाकर मिस्र और जॉर्डन में बसाया जाए। ट्रंप के इस सुझाव की फलस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने कड़ी निंदा की है। दूसरी तरफ, संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने फलस्तीनी शरणार्थियों को चेतावनी दी है कि यदि इस्राइल ने पूर्वी यरूशलम में अपने मुख्यालय को बंद करने का निर्णय लिया, तो इसका असर हजारों फलस्तीनियों पर पड़ेगा।
इस्राइली कब्जे वाले पश्चिमी तट के कुछ हिस्सों पर नियंत्रण रखने वाले फलस्तीनी प्राधिकरण ने एक बयान में कहा है कि गाजा पट्टी से बड़े पैमाने पर विस्थापन की संभावना 'लाल रेखाओं का उल्लंघन' है, जिसकी उन्होंने बार-बार चेतावनी दी है।
फलस्तीनी प्राधिकरण ने कहा- हमारे लोग नहीं जाएंगे
फलस्तीनी प्राधिकरण ने कहा है कि हमारे लोग नहीं जाएंगे। प्राधिकरण ने गाजा के लोगों को विस्थापित करने वाली इस्राइली नीति के दुष्परिणामों की चेतावनी दी, जिससे अस्थिरता और सुरक्षा का खतरा पैदा होगा।
स्वतंत्र फलस्तीन की स्थापना के लिए हम तैयार: राष्ट्रपति अब्बास
अमेरिकी राष्ट्रपति ने सुझाव दिया है कि फलस्तीनी लोगों को गाजा से निकालकर मिस्र और जॉर्डन में बसाया जाए। ट्रंप के इस सुझाव से फलस्तीनी लोगों को डर है कि उन्हें उनकी मातृभूमि से निकाला जा सकता है। वहीं, फलस्तीनी राष्ट्रपति अब्बास ने कहा है कि वह 'गाजा पट्टी में अपने कर्तव्यों को संभालने के लिए तैयार हैं।', ताकि एक स्वतंत्र फलस्तीन की स्थापना हो सके।
2005 में, इस्राइली सैनिक गाजा से वापस चले गए थे। इसके बाद फलस्तीनी प्राधिकरण ने इस क्षेत्र को प्रशासित किया। हालांकि, दो साल बाद इस्राइल के प्रतिद्वंदी हमास ने इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया।
UNRWA ने पूर्वी यरूशलम मुख्यालय बंद करने की धमकी पर जताई चिंता
संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (UNRWA) ने इस्राइल द्वारा पूर्वी यरूशलम मुख्यालय बंद करने की धमकी पर चिंता जताई। एजेंसी ने कहा कि यदि मुख्यालय बंद कर दिया गया तो इसका असर हजारों फलस्तीनियों पर पड़ेगा।
पूर्वी यरूशलम में 12 सुविधाएं देती है UNRWA
बता दें कि यूएनआरडब्ल्यूए पूर्वी यरूशलम में 12 सुविधाएं देती है, कम से कम 1,200 नामांकन वाले स्कूल और 70,000 से अधिक लोगों के लिए मुफ्त क्लिनिक सेवा शामिल है।
मुख्यालय बंद होने से लोगों की शिक्षा-चिकित्सा पर पड़ेगा असर
एजेंसी की प्रवक्ता जूलियट तौमा ने कहा कि यदि यरूशलम मुख्यालय बंद हो गया, तो इसका लोगों के जीवन पर तुरंत प्रभाव पड़ेगा। क्योंकि शुआफत शरणार्थी शिविर के लोगों को बेहतरीन क्लिनिक सेवाओं के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ेगा, जिससे गरीबों के लिए और भी कठिनाई होगी। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि अगर स्कूल बंद होते हैं, तो इससे कई समस्याएं पैदा होंगी, क्योंकि पूर्वी यरूशलम के फलस्तीनी इलाकों में पहले से ही कक्षाओं की कमी है।
इस्राइली आदेश में कई बातें अस्पष्ट: तौमा
तौमा ने यह भी कहा कि इस्राइल के आदेश के बारे में कई बातें अस्पष्ट हैं, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या बंद केवल पूर्वी यरूशलम पर लागू होगा या पूरे फलस्तीनी क्षेत्रों पर। वहीं, इस्राइल का कहना है कि एजेंसी ने हमास को घुसपैठ करने की अनुमति दी है, जबकि संयुक्त राष्ट्र ने इन आरोपों का खंडन किया है।