Gaza Conflict: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह इस सप्ताहांत मध्य पूर्व का दौरा कर सकते हैं। इस दौरान इस्राइल और हमास के बीच गाजा में संघर्ष को खत्म करने के लिए शांति वार्ता जारी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि वे इस सप्ताहांत मध्य पूर्व का दौरा कर सकते हैं। यह दौरा गाजा में इस्राइल और हमास के बीच जारी शांति वार्ता के बीच हो सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रंप द्वारा प्रस्तावित शांति रोडमैप पर हमास और इस्राइल दोनों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। इस योजना के तहत गाजा में बंद इस्राइली बंदियों को रिहा करने के बदले में फिलिस्तीनी बंदियों को इस्राइल की जेलों से मुक्त किया जाएगा। हालांकि इसके कुछ अहम विवरण अभी भी बातचीत के अधीन हैं।
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बातचीत बहुत अच्छी दिशा में जा रही है-ट्रंप
ट्रंप ने कहा कि गाजा में इस्राइल और हमास के बीच शांति समझौता बहुत करीब है। मैं शायद सप्ताह के अंत में संभवतः रविवार को वहां जाऊं। बातचीत बहुत अच्छी दिशा में जा रही है। अमेरिका के शीर्ष मध्य पूर्व सलाहकार कतर के प्रधानमंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारी बुधवार को मिस्र के एक रिसॉर्ट में जारी शांति वार्ता के तीसरे दिन में शामिल हुए। यह संकेत देता है कि सभी पक्ष अमेरिकी शांति योजना के सबसे कठिन मुद्दों पर गंभीरता से बातचीत करने के लिए तैयार हैं।
अक्तूबर 2023 में शुरू हुआ था युद्ध
हमास की ओर से वरिष्ठ नेता खलील अल-हय्या प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जो रविवार को मिस्र पहुंचे। हमास यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सभी बंधकों की रिहाई के बाद इस्राइल अपनी सैन्य कार्रवाई दोबारा न शुरू करे। सभी पक्ष इस लंबे समय से जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए आशावादी हैं। गाजा में यह युद्ध अक्तूबर 2023 में हमास द्वारा दक्षिणी इस्राइल पर हमले के बाद शुरू हुआ था, जिसने अब तक हजारों फिलिस्तीनियों की मौत और अधिकांश इलाके में भारी तबाही मचा दी है।
क्या है ट्रंप की योजना, पहले समझिए
फिलहाल, ट्रंप की योजना के तहत हमास तीन दिनों में 48 बचे हुए बंधकों को छोड़ देगा, जिनमें से करीब 20 जिंदा माने जाते हैं। इसके अलावा, हमास को सत्ता छोड़नी होगी और हथियार डालने होंगे। बदले में इस्राइल अपनी सैन्य कार्रवाई बंद करेगा, कई क्षेत्रों से पीछे हटेगा, सैकड़ों कैदियों को रिहा करेगा और मानवीय मदद तथा पुनर्निर्माण की अनुमति देगा।
हालांकि, हमास ने हथियार डालने पर कोई स्पष्ट बात नहीं की है और कुछ मुद्दों पर फलस्तीन के बीच आगे सलाह-मशविरा जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि हमास की इस 'हां, लेकिन,' वाली नीति पुरानी मांगों को नरम भाषा में पेश करने जैसी है और असल में हालात में ज्यादा बदलाव नहीं आया है।