फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शोधकर्ताओं का दावा: बागवानी करने से कम होगा कैंसर का जोखिम, मानसिक सेहत रहेगी दुरुस्त

Sun, 08 Jan 2023 05:27 AM IST
गुलाम अहमद वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

सीयू बोल्डर संस्थान के पर्यावरण अध्ययन विभाग के शोधकर्ताओं ने पाया कि सामुदायिक बागवानी करने वाले ऐसे लोग, जिनके खाने में फाइबर की मात्रा ज्यादा रहती है और जो जमकर शारीरिक मेहनत करते हैं, उनमें कैंसर और पुरानी बीमारियों का जोखिम काफी कम हो जाता है।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : istock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कसरत, अच्छा खाना, नए लोगों से दोस्ती और बागवानी ये आपको कैंसर सहित कई गंभीर रोगों के होने का जोखिम कम कर सकते हैं। ऐसा करने वाले लोगों की मानसिक सेहत भी दुरुस्त रहती है। यह दावा एक शोध में किया गया है। अध्ययन के नतीजे हाल ही में लैंसेट प्लेनेटरी हेल्थ जर्नल में प्रकाशित हुए। 

विज्ञापन


अमेरिकन कैंसर सोसाइटी की तरफ से वित्त पोषित सीयू बोल्डर संस्थान के पर्यावरण अध्ययन विभाग के शोधकर्ताओं ने पाया कि सामुदायिक बागवानी करने वाले ऐसे लोग, जिनके खाने में फाइबर की मात्रा ज्यादा रहती है और जो जमकर शारीरिक मेहनत करते हैं, उनमें कैंसर और पुरानी बीमारियों का जोखिम काफी कम हो जाता है।

शोध टीम की अध्यक्षता करने वाले प्रो. जिल लिट ने बताया, वे लंबे समय से कैंसर व पुरानी बीमारियों के जोखिम को कम करने के लिए किफायती, व्यापक और टिकाऊ तरीकों की पहचान करने में जुटे हैं।  प्रो. लिट ने 41 वर्ष औसत उम्र के 291 वयस्कों को शोध में शामिल किया।
विज्ञापन


असल राज फाइबर में छिपा 
बागवानी करने वाले समूह के लोग फल-सब्जियां ज्यादा खाने लगे। प्रो. लिट के मुताबिक, बागवानी के चुने गए लोग, दूसरे समूह की तुलना में प्रतिदिन सात फीसदी ज्यादा फल-सब्जियां खाने लगे। असल में फल-सब्जियों में फाइबर पर्याप्त मात्रा में होता है, जो प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं, चयापचय सहित पेट के पूरे माइक्रोबायोम पर प्रभाव दिखाता है।

कितना फाइबर जरूरी
चिकित्सकों के मुताबिक प्रतिदिन एक वयस्क को 25-40 ग्राम फाइबर लेना चाहिए। जबकि, औसतन एक व्यक्ति 16 ग्राम तक फाइबर ही लेता है।

तनाव व चिंता में आई कमी 
बागवानी समूह के लोगों ने बताया, उन्होंने जबसे बागवानी शुरू की वे पहले से कम तनाव और चिंताग्रस्त रहने लगे। डेनवर अरबन गार्डन की निदेशक लिंडा एपल कहती हैं, उनके संगठन की मदद से हर साल 18,000 लोग सामुदायिक बागवानी कर अपने लिए फल-सब्जियां उगाते हैं। कई लोगों के लिए यह जिंदगी बदलने वाल हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें