जापान और यूरोपियन यूनियन (ईयू) ने जी-7 के तहत इस अमेरिकी प्रस्ताव का विरोध किया है कि अब रूस पर हर तरह का निर्यात प्रतिबंध लगा दिया जाए। जी-7 का शिखर सम्मेलन अगले महीने जापान के हिरोशिमा में होगा। अमेरिका चाहता है कि इस शिखर सम्मेलन में जी-7 से जुड़े देश रूस से हर प्रकार का निर्यात रोकने का फैसला करें।
पिछले साल यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद जी-7 ने एक के बाद दूसरे खास क्षेत्रों की पहचान उनमें आयात-निर्यात रोकने का फैसला किया है। अमेरिका की शिकायत है कि इस नजरिए के कारण ऐसी खामियां छूट गई हैं, जिनकी वजह से विभिन्न देश रूस के साथ कारोबार जारी रखने में सफल रहे हैं।
ब्रिटिश अखबार द फाइनेंशियल टाइम्स ने अपनी एक खास खबर में बताया है कि उसने संपूर्ण प्रतिबंध के बारे में अमेरिका की तरफ से भेजे गए प्रस्ताव का अध्ययन किया है। इसमें कहा गया है कि कृषि, मेडिकल और कुछ अन्य उत्पादों को छोड़ कर बाकी हर चीज को प्रतिबंध की श्रेणी में डाल देना चाहिए। दो अधिकारियों ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि साल भर बाद भी रूस से विभिन्न देशों के कारोबारी संबंध बने रहने को लेकर अमेरिकी प्रशासन में गहरा असंतोष है।
जी-7 शिखर बैठक के लिए एक तैयारी बैठक पिछले हफ्ते हुई थी। उसमें जापान और ईयू के प्रतिनिधियों ने कहा कि रूस पर संपूर्ण प्रतिबंध लगाना संभव नहीं है। उनमें से एक अधिकारी ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया- ‘हमारी समझ में यह प्रस्ताव अमल में लाने योग्य नहीं है।’ इस बारे में फाइनेंशियल टाइम्स ने अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद से संपर्क किया, तो परिषद ने इस बारे में कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उसके प्रवक्ता ने सिर्फ यह कहा- रूस को जवाबदेह ठहराने के तरीकों को ढूंढना हम जारी रखेंगे।
प्रवक्ता ने कहा, जी-7 के सहयोगियों के साथ मिल कर हमने रूस पर इतने बड़े पैमाने पर प्रतिबंध और निर्यात नियंत्रण लगाए हैं, जितना इसके पहले किसी बड़े देश पर नहीं लगाए गए। इन कदमों का महत्त्वपूर्ण प्रभाव भी हुआ है। अब तक पश्चिमी देशों की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधों का मकसद टेक्नोलॉजी, मशीनरी और वित्त के क्षेत्र में रूस को अलग-थलग करना रहा है। लेकिन कई देश इन प्रतिबंधों का उल्लंघन करने में सफल रहे हैं। अमेरिका, ब्रिटेन और ईयू की मुख्य चिंता यह है कि प्रतिबंध लगाना तो दूर तुर्किये, यूएई और मध्य एशियाई देशों ने बीते 14 महीनों में रूस के साथ अपना कारोबार बढ़ा लिया है। अब जी-7 इन देशों पर दबाव बढ़ाना चाहता है।
जी-7 के नेताओं की तीन दिन की शिखर बैठक 19 मई से होगी। इसमें यूक्रेन पर रूसी हमले के प्रबावों, आर्थिक सुरक्षा, ग्रीन निवेश और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के समीकरण पर खास चर्चा होगी। जहां तक रूस पर नए प्रतिबंधों का सवाल है, उससे सबसे ज्यादा दिक्कत ईयू को है। 27 देश ईयू के सदस्य हैं। किसी प्रतिबंध पर फैसला लेने के पहले ईयू को इन देशों के बीच आम सहमति बनानी पड़ती है। अभी तक प्रतिबंध के 10 पैकेजों पर इन देशों में सहमति बनी है, हालांकि इनके बीच कुछ देशों को कुछ मामलों में रियायत देनी पड़ी है।