यहां जी-20 शिखर सम्मेलन के आयोजन की चल रही जोरदार तैयारियों के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के यहां आने या ना आने को लेकर असमसंजस बना हुआ है। रूसी सूत्रों से मिली एक खबर में कहा गया था कि पुतिन के इस शिखर सम्मेलन में भाग लेने की संभावना बहुत कम है। इसी बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीमीर जेलेन्स्की ने यह कह कर अनिश्चिय बढ़ा दिया है कि अगर पुतिन जी-20 शिखर सम्मेलन में आए, तो इसमें भाग नहीं लेंगे।
वैसे यूक्रेन जी-20 का सदस्य नहीं है। लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद बने हालात के बीच मेजबान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने उन्हें खास तौर पर आमंत्रित किया था। इसके पहले पश्चिमी देशों ने दबाव डाला था कि इसमें पुतिन को न बुलाया जाए। जबकि चीन ने कहा था कि अगर रूस को नहीं आमंत्रित किया गया, तो वह भी इसमें हिस्सा नहीं लेगा। इन हालात में बीच का रास्ता निकालते हुए विडोडो ने रूस और यूक्रेन दोनों के राष्ट्रपतियों को यहां आमंत्रित किया है।
जी-20 का शिकर सम्मेलन पर्यटन स्थल बाली में 14 और 14 नवंबर को होगा। वहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। इंडोनेशिया सरकार ने 18 हजार सुरक्षाकर्मियों को वहां तैनात किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग यहां आने की पुष्टि कर चुके हैं। लेकिन पुतिन ने इस बारे में अभी कोई एलान नहीं किया है। लेकिन उन्होंने संकेत दिया है कि वे शायद ना आएं। कुछ दिन पहले वल्दाई डिसक्सन ग्रुप को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि 15 घंटों की हवाई यात्रा कर वे बाली जाएं या नहीं, इस बारे में अभी उन्होंने मन नहीं बनाया है। उन्होंने कहा- लेकिन अगर मैं नहीं गया, तब भी रूस का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल वहां जाएगा।
इस बीच इंडोनेशिया स्थित रूसी राजदूत ल्युडमिला वोरोबयोवा ने कहा है कि पुतिन का बाली आना या ना आना यूक्रेन की स्थिति पर निर्भर करेगा। उधर बाइडन साफ कर चुके हैं कि अगर पुतिन बाली आए, तब भी वे उनसे अलग से मुलाकात नहीं करेंगे। जबकि अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बावजूद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने संकेत दिया है कि बाली में उनकी बाइडन के साथ द्विपक्षीय वार्ता हो सकती है।
इंडोनेशियाई मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक बाली सम्मेलन के बाद शी जिनपिंग जकार्ता आएंगे। यहां उनकी राष्ट्रपति विडोडो से सीधी वार्ता होगी। इंडोनेशिया चीन की महत्त्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव योजना में शामिल है, लेकिन इससे जुड़े प्रोजेक्ट्स पर हाल में काम की रफ्तार धीमी रही है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक दोनों राष्ट्रपति इस परियोजना में रफ्तार लाने के उपायों पर बातचीत करेंगे।
विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि पुतिन पिछले साल रोम में हुए जी-20 शिखर सम्मेलन में भी नहीं गए थे। उस समय बताया गया था कि कोरोना महामारी के कारण वे रोम नहीं गए। उनकी जगह रूस के वित्त मंत्री एंटन सिलुआनोव ने रूस की नुमाइंगदी वहां की थी।
इस बीच रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के एक बयान को भी इस बात का संकेत समझा गया है कि रूसी राष्ट्रपति जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग नहीं लेंगे। लावरोव ने कहा- ‘अगर पश्चिम बातचीत नहीं चाहता है और यह चाहता है कि युद्ध में यूक्रेन रूस को हरा दे, तो फिर पश्चिमी नेताओं के साथ बातचीत के लिए कुछ नहीं बचता है।’