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US: क्या इस्राइल-गाजा पर बदल रहा अमेरिका का रुख? जानें बाइडन के हालिया बयानों के मायने और UN में वीटो की वजह

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Fri, 20 Oct 2023 04:54 PM IST

सार

Israel Hamas War and American Stand: हमास-इस्राइल लड़ाई की शुरुआत में अमेरिका का रुख पूरी तरह इस्राइल के पक्ष में दिखा। हालांकि, संघर्ष के बीच इसने इस्राइल को फलस्तीन पर कब्जा न करने की चेतावनी दी। आइये समझते हैं अब तक अमेरिका का रुख कैसे बदला...
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इस्राइल और हमास के बीच हिंसक लड़ाई - फोटो : AMAR UJALA

इस्राइल और हमास के बीच हिंसक लड़ाई जारी है। 14 दिन से राजी संघर्ष ने दुनिया को भी दो धड़ों में बांट दिया है। एक तरफ यूरोपीय देश खुलकर इस्राइल का समर्थन कर रहे हैं। वहीं, अरब देश फलस्तीन के लोगों पर हमले की निंदा कर रहे हैं। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन इस्राइल पहुंचे। बाइडन के बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक भी अपना समर्थन जताने इस्राइल पहुंचे।

इन सबके बीच अमेरिका के बदले बयानों की भी खूब चर्चा हो रही है। एक तरफ वह शुरू से ही इस्राइल का समर्थन कर रहा है। दूसरी तरफ उसकी तरफ से कहा जाता है कि युद्ध के नियमों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। एक ओर अमेरिका संयुक्त राष्ट्र संघ में ब्राजील के प्रस्ताव पर वीटो लगा देता है। इसके बाद राष्ट्रपति बाइडन गाजा के लिए मदद का एलान कर देते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर अमेरिका का रुख है क्या? क्या सच में अमेरिका का रुख बार-बार बदल रहा है? बाइडन ने इस्राइल दौरे में क्या हुआ? अब अमेरिका में बाइडन ने किसका पक्ष लिया है? आइये समझते हैं...

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इस्राइल और हमास के बीच हिंसक लड़ाई - फोटो : AMAR UJALA
इस्राइल और हमास के बीच हिंसक लड़ाई जारी है। 14 दिन से राजी संघर्ष ने दुनिया को भी दो धड़ों में बांट दिया है। एक तरफ यूरोपीय देश खुलकर इस्राइल का समर्थन कर रहे हैं। वहीं, अरब देश फलस्तीन के लोगों पर हमले की निंदा कर रहे हैं। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन इस्राइल पहुंचे। बाइडन के बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक भी अपना समर्थन जताने इस्राइल पहुंचे।

इन सबके बीच अमेरिका के बदले बयानों की भी खूब चर्चा हो रही है। एक तरफ वह शुरू से ही इस्राइल का समर्थन कर रहा है। दूसरी तरफ उसकी तरफ से कहा जाता है कि युद्ध के नियमों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। एक ओर अमेरिका संयुक्त राष्ट्र संघ में ब्राजील के प्रस्ताव पर वीटो लगा देता है। इसके बाद राष्ट्रपति बाइडन गाजा के लिए मदद का एलान कर देते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर अमेरिका का रुख है क्या? क्या सच में अमेरिका का रुख बार-बार बदल रहा है? बाइडन ने इस्राइल दौरे में क्या हुआ? अब अमेरिका में बाइडन ने किसका पक्ष लिया है? आइये समझते हैं...

इस्राइल-हमास - फोटो : AMAR UJALA
हमास-इस्राइल लड़ाई की शुरुआत में अमेरिका का क्या रुख था? 
हमास ने सात अक्तूबर को इस्राइल पर अचानक हमला कर दिया। हमास ने गाजा से सुबह अचानक थोड़े-थोड़े अंतराल पर इस्राइली शहरों पर ताबड़तोड़ करीब 5,000 रॉकेट दागे। यही नहीं, हमास के बंदूकधारी इस्राइली शहरों में भी घुस गए और कुछ सैन्य वाहनों पर कब्जा कर हमले किए। कई इस्राइली सैनिकों को बंधक भी बना लिया और सैकड़ों लोग मारे गए।

हमले के अगले दिन यानी आठ अक्तूबर की सुबह अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात की। इस दौरान उन्होंने हमास आतंकियों के हमले की निंदा की और स्पष्ट किया कि अमेरिका हर तरह की मदद के लिए तैयार है। बाइडन ने कहा कि आतंक कभी भी स्वीकार्य नहीं किया जाएगा और इस्राइल को खुद की और अपने लोगों की रक्षा करने का अधिकार है। 

इसके साथ ही बाइडन ने इस स्थिति में लाभ चाहने वाले किसी भी अन्य इस्राइल विरोधी दल को कड़ी चेतावनी दे डाली। इस्राइल की सुरक्षा के लिए मेरे प्रशासन का समर्थन दृढ़ और अटूट है।

बाइडन ने हमास हमले को होलोकॉस्ट करार दिया
राष्ट्रपति बाइडन ने 12 अक्तूबर को व्हाइट हाउस में यहूदी नेताओं की गोलमेज बैठक को संबोधित किया। इस दौरान बाइडन ने हमास के हमलों को बेहद क्रूर बताया। बाइडन ने कहा कि उनका मानना है कि होलोकॉस्ट के बाद यह यहूदियों के लिए सबसे घातक दिन है। बता दें कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजियों ने 60 लाख यूरोपीय यहूदियों की हत्या कर दी थी। इसी नरसंहार को होलोकॉस्ट कहा जाता है। यहां बाइडन ने यह भी कहा कि इस्राइल को कोई भी कार्रवाई युद्ध के नियमों के अनुसार करनी चाहिए। 

Antony Blinken-Benjamin Netanyahu - फोटो : सोशल मीडिया
इस्राइल को समर्थन देने के लिए विदेश मंत्री ने देश का दौरा किया 
इस्राइल-हमास लड़ाई के बीच 13 अक्तूबर को अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन इस्राइल पहुंचे। इस्राइल दौरे के दौरान ब्लिकंन ने कहा कि इस्राइल जवाबी कार्रवाई कर रहा है, लेकिन उसका लक्ष्य फलस्तीनी नागरिक नहीं है।

ब्लिंकन ने आगे कहा कि हमास नागरिकों को ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। हमास को पहले तो बुनियादी मुद्दे को जानना चाहिए। इस्राइल खुद को आतंकवाद से बचाने के लिए सुरक्षा अभियान चला रहा है। इस्राइली सरकार से चर्चा के दौरान हमने सुनिश्चित किया कि गाजा में रहने वाले लोगों की मानवीय जरूरतों का ख्याल रखा जाए। गाजा के नागरिकों को नुकसान से बचाने की हर संभावनाओं पर बात की गई। इसके अलावा बाइडन ने राष्ट्रपति बाइडन के  रूख को भी दोहराया। 

अचानक अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने इस्राइल को चेतावनी दी
15 अक्तूबर को एक साक्षात्कार के दौरान राष्ट्रपति बाइडन ने गाजा पट्टी पर लंबे समय से कब्जा करने की कोशिश पर इस्राइल को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि इस्राइल को लंबे समय तक गाजा पट्टी को अपने नियंत्रण में नहीं रखना चाहिए। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इस्राइल युद्ध के नियमों के अनुसार कार्य करेगा। निर्दोष नागरिकों को दवा, पानी और भोजन पहुंचाया जाएगा।

इस्त्राइल-हमास युद्ध - फोटो : AMAR UJALA
गाजा अस्पताल में हमले के बाद इसकी प्रतिक्रिया रही? 
सात अक्तूबर से शुरू हुए युद्ध के कुछ दिनों बाद शांति वार्ता होने की उम्मीदें जगीं। हालांकि, 17 अक्तूबर को गाजा के अस्पताल में हुए रॉकेट हमलों ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया, जिसमें सैकड़ों लोगों की मौत का दावा किया गया। इसी हमले की वजह से 18 अक्तूबर को जॉर्डन में होने वाला शिखर सम्मेलन रद्द कर दिया गया, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन शामिल होने वाले थे। 

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने नेतन्याहू को गले लगाकर दिया सांत्वना। - फोटो : Social Media
बाइडन के इस्राइल दौरे में क्या हुआ?
ब्लिंकन के बाद 18 अक्तूबर को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन इस्राइल पहुंचे। बाइडन का दौरा उस समय हुआ, जब गाजा में एक अस्पताल में रात को एक भीषण धमाका हुआ। इसे लेकर जहां फलस्तीन के संगठनों ने इस्राइल पर आरोप लगाए हैं, वहीं इस्राइल ने इसके पीछे फलस्तीन इस्लामिक जिहाद को जिम्मेदार बताया है। आरोप-प्रत्यारोप के इस दौर के बीच तेल अवीव पहुंचे बाइडन का जोरदार स्वागत किया गया। एयरपोर्ट पर बाइडन और नेतन्याहू ने गले लगकर एकजुटता का संदेश दिया। जब दोनों नेता मिले तो अमेरिकी पक्ष ने इस्राइल के लिए समर्थन दोहराया। वहीं नेतन्याहू से बातचीत के बाद साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में बाइडन ने कहा कि अस्पताल पर हमले के पीछे किसी और का हाथ लगता है। इस दौरान बाइडन ने यह भी कहा कि हम यहां से कहां जाएं, इस पर विस्तृत चर्चा की उम्मीद कर रहे हैं।

फलस्तीन इस्लामिक जिहाद (पीआईजे) - फोटो : AMAR UJALA
हमले की जांच के लिए अमेरिका को साझा की गई जानकारी 
7 अक्तूबर को हमास के हमले के बाद से अमेरिका ने लगातार इस्राइल का साथ दिया है। बाइडन ने अपनी मुलाकात के दौरान भी अपना रुख दोहराया। उधर अमेरिका गाजा अस्पताल में हुए हमले की जांच में जुट गया जिसके आरोप इस्राइल पर लगाए गए। हालांकि, इस्राइल ने हमले के पीछे फलस्तीन इस्लामिक जिहाद का हाथ बताया है। इस बीच एक इस्राइली अधिकारी ने कहा कि इस्राइल ने घातक हमले से संबंधित खुफिया जानकारी अमेरिका को दे दी है। अमेरिका इसकी जांच कर रहा है।

इस्राइल की मदद कर रहा अमेरिका 
अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन ने लड़ाई के शुरू होते ही इस्राइल के लिए हथियारों से लेकर आर्थिक मदद मुहैया कराने का एलान किया था। इस्राइली मीडिया रिपोर्ट में जानकारी दी गई है कि अमेरिका अपने हजारों सैनिक इस्राइल भेजेगा, जिससे क्षेत्र में व्यापक सैन्य ताकत व्यापक रूप से बढ़ेगी। इनमें दो अमेरिकी विमान वाहक और उनके संबंधित एस्कॉर्ट जहाजों की तैनाती शामिल है, जो लगभग 15,000 सैनिकों को ले जाएंगे। 

रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 4,000 नौसैनिकों और नाविकों वाली टास्क फोर्स की तैनाती की जानी है। वहीं करीब 2,000 सहायक सैनिकों को अलर्ट पर रखा गया है और कहा गया है कि वे कुछ दिनों के भीतर जाने के लिए तैयार रहें।

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी सेना इस्राइल में हथियार और अन्य सुरक्षा सहायता भेजना जारी रखे हुए है। अपने दौरे में बाइडन ने मिस्र के साथ एक सौदे की भी घोषणा की जिससे राफा क्रॉसिंग होते हुए मानवीय मदद लिए हुए 20 ट्रक फलस्तीन जाएंगे। 

इस बीच रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिका ने इस्राइल की आयरन डोम वायु-रक्षा प्रणाली, छोटे आकार वाले बम और अन्य जीपीएस-से निर्देशित होने वाले हथियारों के लिए अधिक मिसाइल इंटरसेप्टर देने की घोषणा की है। इसके साथ ही अमेरिका ने गाजा और वेस्ट बैंक के लिए 100 मिलियन डॉलर (करीब 883 करोड़ रुपये) के नए फंड की भी घोषणा की। बाइडन ने इस्राइल दौरे पर कहा कि वह अमेरिकी संसद से लगभग 100 बिलियन डॉलर (करीब 88300 करोड़ रुपये) का अनुपूरक अनुरोध करने की योजना बना रहे हैं जिसमें इस्राइल और यूक्रेन के लिए रक्षा सहायता शामिल होगी।

UNSC - फोटो : iStock
यूएन में वीटो कर अमेरिका ने चौंकाया
जिस दिन बाइडन का इस्राइल दौरा हुआ उसी दिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हमास के हमले की निंदा वाला प्रस्ताव अमेरिका ने वीटो कराकर खारिज करवा दिया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 18 अक्तूबर को ब्राजील के प्रस्ताव पर मतदान हुआ जिसमें इस्राइल के खिलाफ हमास के हमलों और नागरिकों के खिलाफ सभी हिंसा की निंदा की गई थी। साथ ही गाजा में फलस्तीनियों को मानवीय सहायता देने का आग्रह किया गया था। इस प्रस्ताव पर अमेरिका ने वीटो कर दिया। 

मतदान के बाद अमेरिकी राजदूत लिंडा थॉमस-ग्रीनफील्ड ने इस पर प्रतिक्रिया भी दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति जो बाइडन इस संघर्ष को कूटनीति से हल करने में लगे हैं। ऐसे में हमें उस कूटनीति को निभाने की जरूरत है। हालांकि, अमेरिकी राजदूत ने इस्राइल के आत्मरक्षा के अधिकार के बारे में कुछ नहीं कहने के लिए प्रस्ताव की भी आलोचना की।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन। - फोटो : ANI
अब अमेरिका में बाइडन ने किसका पक्ष लिया है? 
राष्ट्रपति बाइडन जब अमेरिका पहुंचे तो यहां अमेरिका का अलग रुख नजर आया। शुक्रवार (20 अक्तूबर) को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने ओवल ऑफिस से राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा, 'मैंने फलस्तीनी प्राधिकरण के राष्ट्रपति अब्बास से भी बात की और दोहराया कि अमेरिका फलस्तीनी लोगों के सम्मान और आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए प्रतिबद्ध है।'

राष्ट्रपति बाइडन ने कहा कि अन्य लोगों की तरह वह फलस्तीनी नागरिकों की मौत से दुखी हैं। खासकर गाजा के अस्पताल में विस्फोट से हुई दुखद मौतों से, जिसमें इस्राइल का हाथ नहीं है। हमें हर निर्दोष की मौत पर दुख होता है।

साथ ही उन्होंने यूक्रेन और इस्राइल को अमेरिका के हितों के लिए अहम बताया और दोनों देशों को सहायता देने पर बात की। बाइडन ने कहा कि वह अमेरिकी संसद (कांग्रेस) से 100 अरब अमेरिकी डॉलर के आपातकालीन कोष का अनुरोध करेंगे। इस प्रस्ताव में यूक्रेन, इस्राइल, ताइवान, मानवीय मदद और सीमा प्रबंधन का जिक्र किया गया है।

Jo biden and Bejamin netanyahu - फोटो : Agency (File Photo)
क्या सच में अमेरिका का रुख बार-बार बदल रहा है?
यूएन में अमेरिका के द्वारा किए गए वीटो के बाद इसके रुख की खूब चर्चा हो रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अमेरिका सच में बार-बार अपना रुख बदल रहा है। हालांकि, ऐसा नहीं है क्योंकि हमास के हमले के बाद से ही अमेरिका ने इस्राइल का साथ दिया है और हमास के खिलाफ कार्रवाई को उसके आत्मरक्षा का अधिकार बताया है। हालांकि, इसने गाजा में हमास विरोधी कार्रवाई में आम लोगों के जान-माल को बचाए रखने की बात बार-बार कही है। 

वीटो को लेकर अमेरिकी राजदूत ग्रीनफील्ड कहती हैं, 'उनके देश ने इस प्रस्ताव को सुरक्षा परिषद में इसलिए वीटो किया है, चूंकि इसमें इस्राइल के आत्मरक्षा के अधिकार का उल्लेख नहीं है। इस्राइल के पास आत्मरक्षा का अन्तर्निहित अधिकार है, जोकि यूएन चार्टर के अनुच्छेद 51 में भी परिलक्षित होता है।'

राजदूत ने आगे कहा, 'अमेरिका इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं कर पाया, मगर इस संकट पर अन्य सदस्य देशों के साथ नजदीकी तौर पर प्रयास जारी रखे जाएंगे। हम आम लोगों की रक्षा सुनिश्चित किए जाने की बात हम दोहराते रहेंगे, जिनमें मीडियाकर्मी, मानवीय राहतकर्मी और यूएन अधिकारी भी हैं। अमेरिका, जमीनी स्तर पर भी कूटनैतिक प्रयासों में जुटा हुआ है और इस क्रम में राष्ट्रपति जो बाइडन और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने यात्राएं की हैं।'

इस्राइल-हमास युद्ध में अमेरिका के रुख पर विदेश मामलों के जानकार सुशांत सरीन कहते हैं, 'शुरू से ही अमेरिका का रुख इस्राइल के पक्ष में रहा है। हालांकि, अमेरिका ने इस्राइली कार्रवाई में आम नागरिकों को कोई नुकसान न पहुंचाने की हिदायत भी दी है। इसके साथ ही अमेरिका ने गाजा में संभावित जमीनी कार्रवाई से स्थिति और भी खराब होने की चेतावनी दी है। ऐसे में अमेरिका का रुख पहले से ही साफ है और इसमें कोई बदलाव नहीं है।'
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