अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को खत्म करने के लिए तैयार हो रही संभावित डील अब अंतिम चरण में पहुंचती दिख रही है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि दोनों पक्ष समझौते के काफी करीब हैं, हालांकि कुछ मुद्दों पर अभी सहमति बनना बाकी है। अगर यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो इसमें केवल युद्धविराम ही नहीं, बल्कि परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत, होर्मुज जलडमरूमध्य, लेबनान संकट और बड़े निवेश पैकेज जैसे कई अहम मुद्दे शामिल होंगे।
1. 60 दिन का सीजफायर और बातचीत
प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका और ईरान 60 दिनों तक संघर्षविराम बढ़ाएंगे। इसी अवधि में दोनों देश स्थायी शांति समझौते और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर विस्तृत बातचीत करेंगे।
हालांकि अमेरिका और ईरान समझौते के काफी करीब बताए जा रहे हैं, लेकिन कई अहम मुद्दों पर अब भी मतभेद बने हुए हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक बातचीत का अधिकांश हिस्सा पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में हुआ है। ऐसे में यह भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि दोनों देश समझौते के एक ही मसौदे पर काम कर रहे हैं या नहीं, और ईरान की ओर से अंतिम मंजूरी देने का अधिकार किसके पास है।
सबसे बड़ा विवाद संघर्षविराम की शर्तों को लेकर है। अमेरिकी पक्ष के अनुसार प्रस्तावित समझौता 60 दिनों के लिए लड़ाई रोकने और आगे की बातचीत का रास्ता खोलने पर केंद्रित है। वहीं ईरान का दावा है कि इसमें लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्ति की घोषणा शामिल है और यह व्यापक स्थायी समझौते की दिशा में एक अंतरिम व्यवस्था होगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी दोनों देशों की व्याख्या अलग-अलग है। अमेरिकी पक्ष चाहता है कि ईरान पहले समुद्री बारूदी सुरंगें हटाए और जहाजों की आवाजाही सामान्य करे, जिसके बाद चरणबद्ध तरीके से अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील दी जाए। दूसरी ओर ईरान का कहना है कि समझौते के तहत अमेरिकी नाकाबंदी 30 दिनों के भीतर हटा ली जाएगी और बातचीत के दौरान जलडमरूमध्य पूरी तरह खुला रहेगा।