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France: अपने फायदे के लिए फ्रांसीसी कंपनी ने कर लिया इस्लामिक स्टेट से सौदा, जानें क्या था पूरा मामला

Wed, 19 Oct 2022 07:56 PM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस

सार

मामले में आरोपी फ्रांसीसी कंपनी लाफार्ज ने अपने आरोप स्वीकार कर लिए हैं। कंपनी ने पहले ही आंतरिक जांच के बाद इस बात को मान लिया था कि उसकी सीरिया में सहायक कंपनी ने अपने प्लांट में कर्मचारियों की सुरक्षा में मदद के नाम पर वहां के कई सशस्त्र समूहों को रुपये दिए थे। हालांकि कंपनी ने ये आरोप मानने से मना कर दिया है कि वह मानवता के खिलाफ अपराधों में शामिल थी।
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इस्लामिक स्टेट - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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फ्रांस की एक कंपनी द्वारा इस्लामिक स्टेट को करोड़ों रुपये देने का खुलासा किया गया है। जब इस पूरे मामले की जांच की गई तो सामने आया है कि फ्रांस की सीमेंट कंपनी लाफार्ज ने आतंकवादी समूह इस्लामिक स्टेट को इसलिए दिए थे क्योंकि वह चाहती थी कि सीरीया में उसका संयंत्र निर्बाध रूप से चलता रहे। इस मामले में कंपनी ने मंगलवार को आरोप भी स्वीकार कर लिए हैं। इतना ही नहीं, कंपनी करीब 77.8 करोड़ डॉलर का जुर्माना भरने को भी राजी हो गई है। वहीं, अमेरिकी न्याय विभाग इस मामले पर हैरानी जता रहा है। इस रिपोर्ट में हम जानेंगे कि ये पूरा मामला क्या है? कैसे कंपनी और इस्लामिक स्टेट के बीच डील हुई और कंपनी ने आतंकवादी समूह को कितने रुपये दिए?

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फ्रांस की कंपनी ने दिए करोड़ों रुपये
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी कंपनी लाफार्ज ने केवल इस्लामिक स्टेट को ही नहीं, बल्कि आतंकवादी संगठन अल-नुसरा फ्रंट को भी बिचौलियों के जरिए रुपये दिए थे। अमेरिकी सरकार ने इसकी पुष्टि की है। अमेरिकी सरकार ने बताया कि फ्रांसीसी कंपनी ने बिचौलियों के जरिए इन दोनों आंतकी संगठनों को करीबन 5.92 मिलियन डॉलर के बराबर भुगतान किया था। जानकारी के मुताबिक, लाफार्ज ने इस्लामिक स्टेट के हमले बढ़ने पर सितंबर 2014 में सीरिया में अपने सीमेंट प्लांट को खाली कर दिया था। जिसके बाद इस्लामिक स्टेट ने कंपनी के प्लांट पर कब्जा कर लिया था। बाद में उसी प्लांट को 3.21 मिलियन डॉलर में कंपनी को दे दिया। 

कब सामने आया मामला
ये मामला तब सामने आया जब साल 2017 में फ्रांस के कुछ कार्पोरेट समूहों ने लाफार्ज पर आरोप लगाया था। इन समूहों का आरोप था कि आरोपी कंपनी ने साल 2011 से 2015 के बीच सीरिया में आईएस समूह के आतंकवादियों सहित सशस्त्र समूहों को 13 मिलियन यूरो का भुगतान किया था। उन्होंने कहा कि कंपनी ने इस्लामिक स्टेट की करतूतों पर जरा भी गौर नहीं किया। गौरतलब है कि फ्रांसीसी कंपनी लाफार्ज को इस मामले में पेरिस में मानवता के खिलाफ अफराधों में मिलीभगत करने का आरोपी बनाया गया है। वहीं, अमेरिका ने एक आतंकी संगठन की मदद करने का आरोप कंपनी पर लगाया है।  
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 इस्लामिक स्टेट का था सीरिया पर कब्जा
बता दें कि जब का ये मामला है उस समय सीरिया के बड़े हिस्से पर इस्लामिक स्टेट का कब्जा था। इतना ही नहीं, उसके कुछ सदस्य पश्चिमी देशों के अपहरण किए गए नागरिकों को प्रताड़ित करने के साथ ही उनका सिर कलम करने में शामिल थे।

कंपनी ने स्वीकार किए आरोप
इस मामले में आरोपी फ्रांसीसी कंपनी लाफार्ज ने अपने आरोप स्वीकार कर लिए हैं। कंपनी ने पहले ही आंतरिक जांच के बाद इस बात को मान लिया था कि उसकी सीरिया में सहायक कंपनी ने अपने प्लांट में कर्मचारियों की सुरक्षा में मदद के नाम पर वहां के कई सशस्त्र समूहों को रुपये दिए थे। हालांकि कंपनी ने ये आरोप मानने से मना कर दिया है कि वह मानवता के खिलाफ अपराधों में शामिल थी। लाफार्ज के अध्यक्ष मगाली एंडरसन ने अदालत में आरोप स्वीकार करते हुए कहा कि अगस्त 2013 से नवंबर 2014 तक कंपनी के पूर्व अधिकारी जानबूझकर और अपनी इच्छा से सीरिया में विभिन्न सशस्त्र समूहों के लाभ के लिए भुगतान करने और साजिश में शामिल होने के लिए सहमत हुए थे। उन्होंने यह भी कहा कि इस रवैये के कारण जो अधिकारि इसमें शामिल थे उन्हें  2017 में कंपनी से अलग कर दिया गया है।
 
अमेरिकी अदालत ने लगाया जुर्माना 

बता दें कि कंपनी पर ये आरोप न्यूयॉर्क शहर की एक संघीय अदालत में तय किए गए। फ्रांस के अधिकारियों ने भी इन आरोपों की जांच की है। ब्रुकलिन की फेडरल कोर्ट ने मंगलवार को इस कंपनी को प्रतिबंधित विदेशी आतंकवादी संगठन को भौतिक सहायता प्रदान करने के आरोप में दोषी ठहराया। इसके अलावा, लाफार्ज ने याचिका में 687 मिलियन डॉलर को जब्त करने और 90 मिलियन डॉलर का जुर्माना भरने पर सहमति जताई है।
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