नाइजर में सैन्य तख्तापलट को बागी सैनिकों द्वारा शासित तीन पश्चिमी अफ्रीका देशों का समर्थन मिलने के बाद मंगलवार फ्रांस ने बड़ा कदम उठाया है। फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को घोषणा की है कि वह अपने नागरिकों और यूरोपीय देशों के लोगों को निकालने की तैयारी कर रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ये निकासी आज से शुरू होगी।
फ्रांसीसी मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि नाइजर के लोकतांत्रिक ढंग से निर्वाचित राष्ट्रपति मोहमद बाजौम के खिलाफ पिछले सप्ताह तख्तापलट से गहराते संकट के बीच फ्रांसीसी एवं अन्य यूरोपीय लोगों को वहां से निकालने का अभियान शुरू किया जा रहा है। मंत्रालय ने कहा कि यह अभियान फ्रांसीसी एवं अन्य यूरोपीय नागरिकों के लिए मंगलवार को शुरू हो रहा है।
अपनी वेबसाइट पर जारी एक बयान में फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि नियामी की स्थिति को देखते हुए परसों हमारे दूतावास के खिलाफ हुई हिंसा और हवाई क्षेत्र को बंद करने से हमारे हमवतन लोगों को देश छोड़ने की संभावना नहीं रह गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, नाइजर में तख्तापलट के समर्थकों द्वारा रविवार को फ्रांसीसी झंडे जलाने और नाइजर की राजधानी नियामी में फ्रांसीसी दूतावास पर हमला करने के बाद फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय का बयान आया है। साथ ही कम से कम चार यूरोपीय देशों ने भी ऐसा ही एलान किया है। इन देशों ने कहा है कि नाइजर में उनके नागरिकों को निकालने की योजना चल रही है।
इस घटना के बाद फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि नाइजर में फ्रांसीसी हितों पर किसी भी हमले का तेज और समझौताहीन जवाब दिया जाएगा।
इटली ने भी की घोषणा
इस बीच, इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने भी कहा है कि सरकार तख्तापलट के बाद नाइजर से नागरिकों को वापस लाने के लिए एक विशेष उड़ान की व्यवस्था करेगी। इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर कहा है कि इतालवी सरकार ने नियामी में अपने नागरिकों के लिए एक विशेष उड़ान की व्यवस्था करने का फैसला किया है।
तख्तापलट समर्थकों ने लगाए पुतिन जिंदाबाद के नारे
इससे पहले एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार को सैन्य तख्तापलट का समर्थन करने वाले हजारों लोगों ने नाइजर में फ्रांस के प्रभाव को लेकर गुस्सा व्यक्त किया और फ्रांसीसी दूतावास पर हमला कर तोड़फोड़ की। रूस ने नाइजर की सेना की कैद से देश के लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति मोहम्मद बजौम को रिहा करने को कहा है। क्रेमलिन के अनुरोध के बावजूद, तख्तापलट समर्थक प्रदर्शनकारियों को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नाम के नारे लगाए। दूतावास के नाम वाली एक पट्टिका को कुछ प्रदर्शनकारियों ने नष्ट कर दिया, जिन्होंने बाद में इसकी जगह रूसी और नाइजीरियाई झंडे लगा दिए। जनता ने फ्रांस मुर्दाबाद, पुतिन जिंदाबाद और रूस जिंदाबाद के नारे लगाए।
प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए, नाइजर में पुलिस अधिकारियों ने आंसू गैस के गोले छोड़े। घटनास्थल पर लोगों को फ्रांसीसी दूतावास के परिसर के बाहर आग लगाने का प्रयास करते देखा गया। इस बीच, एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के कार्यालय ने घोषणा की कि नाइजर में फ्रांसीसी व्यक्तियों या सुविधाओं पर हमला करने वाले किसी भी व्यक्ति को फ्रांस से तुरंत जवाबी कार्रवाई की जाएगी।
टीवी पर लाइव आकर किया एलान
कुछ दिन पहले नाइजर के राष्ट्रीय चैनल पर सैनिकों ने तख्तापलट का एलान किया। कर्नल अमादौ अब्द्रमाने अपने साथी सैनिकों और अधिकारियों के साथ टीवी पर आए। उन्होंने टीवी पर बजौम की सरकार को पलट देने का एलान किया। विदेशी रिपोर्ट के अनुसार, कर्नल ने टीवी पर लाइव आकर कहा कि देश की बिगड़ती सुरक्षा व्यवस्था और खराब शासन के कारण हम राष्ट्रपति शासन को खत्म कर रहे हैं। नाइजर के बॉर्डर सील हैं। अब न तो कोई देश से बाहर जा सकता है और न ही बाहर से देश में प्रवेश कर सकता है। पूरे देश में कर्फ्यू है। सरकारी अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया है।
फ्रांस से स्वतंत्रता के बाद से सैन्य तख्तापलट होते रहे हैं
1960 में फ्रांस से स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद से, नाइजर में अक्सर सैन्य तख्तापलट होते रहे हैं, हालाँकि, हाल ही में राजनीतिक अस्थिरता में कमी आई है। 2021 में, देश के पहले लोकतांत्रिक सत्ता हस्तांतरण में बजौम को राष्ट्रपति चुना गया था। पश्चिम अफ्रीकी राज्यों के आर्थिक समुदाय ईसीओडब्ल्यूएएस ने रविवार को एक सप्ताह के भीतर बजौम की रिहाई और बहाली की मांग की। समूह ने घोषणा की कि वह नाइजर गणराज्य में संवैधानिक व्यवस्था को बहाल करने के लिए सभी आवश्यक उपाय करेगा, जिसमें जुंटा सत्ता में बने रहने पर बल का उपयोग भी शामिल है।