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फ्रांस में राष्ट्रपति चुनावः मतदान के ट्रेंड से मैक्रों खेमे की बढ़ेगी चिंता, 24 अप्रैल से है दूसरा चरण

Tue, 12 Apr 2022 01:43 PM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस

सार

मैक्रों के लिए सबसे बड़ी चिंता का पहलू वामपंथी नेता ज्यां-लुक मेलेन्शां का अपेक्षा से अधिक वोट हासिल कर लेना है। मेलेन्शां को 22 फीसदी से भी ज्यादा वोट मिले। मेलेन्शां के समर्थकों को सत्ता विरोधी समझा जाता है।
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Emanuel Macron - फोटो : PTI
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विस्तार
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 फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव के लिए हुए पहले चरण के मतदान में जो रूझान दिखे, उससे राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के खेमे की चिंता बढ़ जाएगी। ये राय राजनीतिक  विश्लेषकों ने दी है। अब 24 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के मतदान में मैक्रों और धुर दक्षिणपंथी नेशनल रैली पार्टी की नेता मेरी ली पेन के बीच सीधा मुकाबला होगा। हालांकि पहले चरण में 27.6 प्रतिशत वोट हासिल कर मैक्रों ली पेन से चार फीसदी मतों के अंतर से आगे रहे, लेकिन मतदान के अन्य ट्रेंड उनके माफिक नहीं रहे। 

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मैक्रों के लिए सबसे बड़ी चिंता का पहलू वामपंथी नेता ज्यां-लुक मेलेन्शां का अपेक्षा से अधिक वोट हासिल कर लेना है। मेलेन्शां को 22 फीसदी से भी ज्यादा वोट मिले। मेलेन्शां के समर्थकों को सत्ता विरोधी समझा जाता है। राजनीतिक टीकाकारों के मुताबिक दूसरे चरण में मेलेन्शॉं समर्थक मतदाताओं में कौन किधर जाएगा, इसका अनुमान लगाना अभी मुश्किल है। लेकिन अनुमान है कि उनका एक बड़ा हिस्सा ली पेन को वोट दे सकता है। आईफॉप नाम की एक सर्वे एजेंसी ने अनुमान लगाया है कि मेलेन्शां समर्थक मतदाताओं का आधा हिस्सा दूसरे चरण के मतदान में शामिल नहीं होगा। बाकी आधे मतदाता मैक्रों और ली पेन के बीच बंट जाएंगे।

पहले चरण का नतीजा आने के बाद मेलेन्शां ने कहा कि ‘एक भी वोट मैडम ली पेन को नहीं जाना चाहिए।’ लेकिन उन्होंने स्पष्ट रूप से मैक्रों को वोट देने की अपील नही की। ली पेन को पहले चरण में लगभग साढ़े 23 फीसदी वोट मिले हैँ। एक अन्य धुर दक्षिणपंथी उम्मीदवार एरिक जिमो को सात फीसदी वोट मिले। जिमो ने अपने समर्थकों से दूसरे चरण में ली पेन को वोट देने की अपील की है।
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कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार फैबियन रोसेल को सवा दो फीसदी वोट मिले। इन मतदाताओं का एक हिस्सा भी ली पेन के पक्ष में जा सकता है। बाकी ज्यादातर उम्मीदवारों ने अपने समर्थकों से मैक्रों का समर्थन करने की अपील की है। लेकिन पर्यवेक्षकों का अनुमान है कि ऐसे बहुत से मतदाता दूसरे चरण के मतदान में शामिल नहीं होंगे। तब मतदान प्रतिशत कम रहेगा। ये बात ली पेन के फायदे में जा सकती है।

ताजा चुनाव नतीजे ने राष्ट्रपति मैक्रों के इस विश्लेषण को सही ठहराया है कि फ्रांस की राजनीति में पहले जैसा लेफ्ट और राइट का बंटवारा नहीं रह गया है। रविवार को वामपंथ और दक्षिणपंथ की परंपरागत पार्टियों का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। परंपरागत दक्षिणपंथी पार्टी द रिपब्लिक की उम्मीदवार वालेरी पिक्रेसी सिर्फ 4.7 प्रतिशत वोट हासिल कर पाईं। जबकि 2007 में इस पार्टी के निकोलस सारकोजी राष्ट्रपति चुने गए थे। परंपरागत वामपंथी दल- सोशलिस्ट पार्टी का हाल तो और भी बुरा हुआ है। उसकी उम्मीदवार एनी हिडालगो तो दो प्रतिशत भी वोट पाने में सफल नहीं हुईं। जबकि 2014 में इस पार्टी के फ्रांक्वां ओलोंद राष्ट्रपति चुने गए थे।

पहले चरण में मतदान का प्रतिशत अपेक्षा से ऊंचा रहा। रविवार को 74 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाले। 2017 के आम चुनाव की तुलना में यह सिर्फ तीन प्रतिशत कम है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक दूसरे चरण में ऊंचे मतदान प्रतिशत का लाभ मैक्रों को मिल सकता है। जबकि कम मतदाता वोट डालने आए, तो ये बात ली पेन फायदे में जा सकती है।

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