फ्रांस की सरकार द्वारा कट्टरपंथी मुस्लिमों को रियायत देने की चर्चाओं के बीच एक पत्र से बवाल मचा हुआ है। इस पत्र में सरकार पर आरोप लगाया गया है कि वह कट्टरपंथियों को रियायत दे रही है। इससे देश में गृहयुद्ध भड़क सकता है। पत्र पर सवा लाख सैनिकों के दस्तखत का दावा किया जा रहा है।
उधर, फ्रांस के गृह मंत्री गेराल्ड डार्मानिन ने इस पत्र को पैंतरेबाजी करार दिया है। उन्होंने कहा कि इस पर जिन लोगों ने दस्तखत किए हैं, उनमें साहस नहीं है। वहीं अगले साल होने वाले फ्रांस के राष्ट्रपति पद के चुनाव की प्रत्याशी दक्षिणपंथी नेता मेरिन ले पेन का कहना है कि अप्रैल में एक हजार जवानों और महिलाओं के समर्थन से प्रकाशित पत्र सही था।
फ्रांस में चर्चित नया पत्र रविवार को 'वेला हेक्चुएल' नामक पत्रिका में छपा था। इस पर जिन सवा लाख लोगों क हस्ताक्षर हैं, वे सैनिक है, यह दावा किया जा रहा है लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है। हमने अफगानिस्तान, माली और अफ्रीका में फ्रांस की ओर से सैन्य सेवाएं दीं। कट्टर इस्लाम से निपटने के लिए संघर्ष किया, लेकिन सरकार हमारे देश में उन्हें रियायत दे रही है। यदि गृह युद्ध छिड़ा तो सेना अपनी व्यवस्था बनाएगी।