‘फ्रांसीसी दक्षिणपंथी पार्टी के अध्यक्ष राष्ट्रीय रैली में ऐतिहासिक जीत का दावा कर रहे हैं और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पर अनिश्चितता और अस्थिरता पैदा करने का आरोप लगा रहे हैं।’
ये बातें जॉर्डन बार्डेला ने मतदान के अनुमानों के बाद बात की। अनुमानों में आश्चर्यजनक तरीके से दिखाया गया कि विधायी चुनावों में वाम गठबंधन ने सबसे अधिक संसदीय सीटें जीतीं। आश्चर्यजनक अनुमानों ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के मध्यमार्गी गठबंधन को दूसरे और धुर दक्षिणपंथी को तीसरे स्थान पर रखा है
एग्जिट पोल में किसी भी एक गठबंधन को बहुमत ना मिलने ने फ्रांस को राजनीतिक और आर्थिक उथल-पुथल दिखाई दे रही है। अत्यधिक अस्थिर मध्यावधि चुनाव में रविवार देर रात या सोमवार की शुरुआत तक अंतिम नतीजे आने की उम्मीद नहीं है।
नई सरकार पर फैसले लेने के लिए मैक्रों करेंगे इंतजार
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के कार्यालय का कहना है कि वह नई सरकार पर कोई भी निर्णय लेने से पहले नई नेशनल असेंबली के खुद के संगठित होने का इंतजार करेंगे।
नेशनल असेंबली 18 जुलाई को पहली बार पूर्ण सत्र में एकत्रित होने वाली है। बयान में कहा गया है कि मैक्रों यह सुनिश्चित करेंगे कि फ्रांसीसी लोगों की संप्रभु पसंद का सम्मान किया जाए।
अनुमानों की मानें तो ऐसा लगता है कि इसमें राष्ट्रपति को कोई फायदा नहीं हुआ है, जिनके गठबंधन ने संसद पर नियंत्रण खो दिया है।
फ्रांस में संसदीय चुनाव के दूसरे चरण का मतदान शुरू हो गया है। नेशनल असेंबली के 577 सदस्यों का चुनाव किया जाएगा। इसमें किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत के लिए 289 सीटों की आवश्यकता होती है। सोमवार को चुनाव के नतीजे आने की उम्मीद की जा रही है।
पिछले सप्ताह फ्रांस में संसदीय चुनाव के पहले चरण का मतदान हुआ था। 577 सदस्यों की निवर्तमान संसद में, फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों के गठबंधन के पास केवल 250 सीटें थीं। उन्हें कानून पारित करने के लिए अन्य पार्टियों के समर्थन की आवश्यकता थी। पिछले रविवार को हुए मतदान के पहले चरण में बढ़त लेने के बाद, पार्टी की दिग्गज मरीन ले पेन के नेतृत्व में 28 वर्षीय जॉर्डन बार्डेला के नेतृत्व वाली दक्षिणपंथी नेशनल रैली (आरएन) आगे रही है। पहले चरण के चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद पेन की पार्टी को सत्ता में आने से रोकने के लिए वामदलों के हजारों समर्थक, प्रवासी प्लेस डे ला रिपब्लिक पर जमा हुए और प्रदर्शन किया।
28 साल के बार्डेला बन सकते हैं फ्रांस के सबसे कम उम्र के पीएम
ले पेन की जीत पर 28 वर्षीय जॉर्डन बर्डेला देश के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बन सकते हैं। नेशनल रैली पार्टी को मजबूत राजनीतिक दल बनाने में उनकी अहम भूमिका है। आरएन को बार्डेला ने एक नया और स्वीकार्य चेहरा दिया है, क्योंकि पार्टी ने पहले चरण में 33 प्रतिशत लोकप्रिय वोट जीते हैं।