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Greenland Geopolitics: फ्रांस-कनाडा ने ग्रीनलैंड में खोले अपने वाणिज्य दूतावास, ट्रंप के बयान से बढ़ा था विवाद

Mon, 09 Feb 2026 03:01 AM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नूक

सार

ग्रीनलैंड की बढ़ती रणनीतिक अहमियत के बीच केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि फ्रांस और कनाडा जैसे देशों ने भी वहां अपनी कूटनीतिक मौजूदगी मजबूत कर दी है। दोनों देशों ने राजधानी नूक में वाणिज्य दूतावास खोल दिए हैं। आर्कटिक सुरक्षा, खनिज संसाधन और भू-राजनीतिक संतुलन को लेकर वैश्विक दिलचस्पी बढ़ी है।
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ग्रीनलैंड को लेकर घमासान जारी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक हलचल के बीच ग्रीनलैंड अब बड़े देशों की कूटनीतिक सक्रियता का केंद्र बन गया है। फ्रांस और कनाडा ने ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में औपचारिक रूप से अपने वाणिज्य दूतावास खोल दिए हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया है। इससे क्षेत्र की भू-राजनीतिक अहमियत और बढ़ गई है।
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नूक में कनाडा और फ्रांस के वाणिज्य दूतावास खुलने को आर्कटिक में बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भागीदारी के रूप में देखा जा रहा है। ग्रीनलैंड डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है, लेकिन सामरिक और खनिज संसाधनों के कारण बड़े देशों की नजर इस पर है। ट्रंप ने हाल में कहा था कि अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से ग्रीनलैंड की जरूरत है। इसके बाद यूरोपीय देशों और सहयोगी राष्ट्रों की कूटनीतिक गतिविधियां तेज हुई हैं।

कनाडा ने सुरक्षा पर दिया जोर
कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने नूक में वाणिज्य दूतावास का उद्घाटन किया और कनाडा का झंडा फहराया। उन्होंने कहा कि आर्कटिक से जुड़े फैसलों में स्थानीय लोगों की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने आर्कटिक कमांड और कनाडाई कोस्ट गार्ड के आइसब्रेकर जहाज का भी दौरा किया। कनाडा ने साफ किया कि क्षेत्रीय सुरक्षा, समन्वय और स्थानीय समुदायों के अधिकार उसकी प्राथमिकता हैं। कार्यक्रम में कनाडा की गवर्नर जनरल मैरी साइमन भी मौजूद रहीं।
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फ्रांस ने भी खोला वाणिज्य दूतावास
फ्रांस ने भी नूक में अपना वाणिज्य दूतावास शुरू किया और जीन-नोएल पोइरियर को पहला कौंसुल जनरल नियुक्त किया। अभी वाणिज्य दूतावास का अलग भवन नहीं है, लेकिन यह पहली बार है जब यूरोपीय संघ के किसी देश ने ग्रीनलैंड में कांसुलर मौजूदगी दर्ज कराई है। फ्रांस ने कहा कि उसका उद्देश्य सांस्कृतिक, वैज्ञानिक, आर्थिक और राजनीतिक रिश्ते मजबूत करना है। साथ ही उसने ग्रीनलैंड पर डेनमार्क की संप्रभुता के समर्थन को दोहराया।

ग्रीनलैंड के नेताओं ने क्या कहा?
ग्रीनलैंड के नेताओं और इनुइट समुदाय के प्रतिनिधियों ने इन वाणिज्य दूतावास के खुलने का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय एकजुटता का संकेत है। स्थानीय नेतृत्व ने इसे ऐसे समय का कदम बताया है जब क्षेत्र दबाव और अनिश्चितता महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड के लोगों की जीवनशैली और अधिकारों का सम्मान होना चाहिए और भविष्य से जुड़े फैसलों में उनकी भूमिका जरूरी है।
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ट्रंप के बयानों के बाद बढ़ा कूटनीतिक दबाव
यह पूरा घटनाक्रम ट्रंप के उन बयानों के बाद सामने आया है, जिनमें उन्होंने ग्रीनलैंड को अमेरिकी सुरक्षा के लिए जरूरी बताया था। उनके रुख पर डेनमार्क और कई नाटो सहयोगियों ने आपत्ति जताई थी। ट्रंप ने पहले यूरोपीय देशों पर टैरिफ की चेतावनी भी दी थी, बाद में कहा कि रणनीतिक खनिज संसाधनों तक पहुंच को लेकर एक ढांचा समझौता बना है। अब फ्रांस और कनाडा की मौजूदगी से ग्रीनलैंड आर्कटिक कूटनीति का नया केंद्र बन गया है।


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