फ्रांस के नए प्रधानमंत्री फ्रेंकोइस बायरू ने चेतावनी दी है कि वह इस हफ्ते अपने बजट को बिना कानूनसभा में वोट के पास करवाने के लिए विशेष कार्यकारी अधिकारों का इस्तेमाल करेंगे। इस कदम से विश्वास मत का प्रस्ताव आ सकता है, जो प्रधानमंत्री बायरू के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
फ्रांस में राजनीति एक बार फिर गरमा गई है, क्योंकि नए प्रधानमंत्री फ्रेंकोइस बायरू ने चेतावनी दी है कि वह इस हफ्ते अपने बजट को बिना कानूनसभा में वोट के पास करवाने के लिए विशेष कार्यकारी अधिकारों का इस्तेमाल करेंगे। इस कदम से विश्वास मत का प्रस्ताव आ सकता है, जो प्रधानमंत्री बायरू के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। अगर कई राजनीतिक दल एकजुट होते हैं, तो इससे उनकी सरकार गिर सकती है। बता दें कि, फ्रांस में दिसंबर महीने में ऐसा ही कुछ हुआ था जब बजट विवादों के कारण प्रधानमंत्री मिशेल बर्नियर को इस्तीफा देना पड़ा था।
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अनुच्छेद 49.3 का इस्तेमाल कर सकते हैं- बायरू
पीएम बायरू ने आगे कहा कि वे संविधान के अनुच्छेद 49.3 का इस्तेमाल करेंगे, जो सरकार को बिना संसद के वोट के कानून बनाने की अनुमति देता है, लेकिन इससे विश्वास मत का खतरा भी होता है। सोमवार को फ्रांसीसी सांसद राज्य बजट पर चर्चा करेंगे, और सप्ताह के अंत तक सामाजिक सुरक्षा बजट पर ध्यान देंगे। बायरू ने कहा, 'हमारे जैसे देश को बजट के बिना नहीं छोड़ सकते। यही एकमात्र तरीका है जिससे सरकार जिम्मेदार बनी रह सकती है।'
लोगों की आपत्तियों के ध्यान में रखकर किया गया बदलाव
यह राजनीतिक संकट तब बढ़ रहा है जब जून में हुए चुनावों के बाद नेशनल असेंबली में कोई स्पष्ट बहुमत नहीं बना। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मिशेल बर्नियर को सितंबर में इस संकट से निकलने के लिए चुना था, लेकिन उनके प्रस्तावित बजट में कटौती और कर बढ़ोतरी ने स्थिति और जटिल कर दी। फ्रेंकोइस बायरू ने जनवरी में कहा था कि वह 62 से 64 साल तक सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाने की योजना पर फिर से विचार करने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा, सरकार के संशोधित बजट में विपक्षी नेताओं के कुछ आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए बदलाव किए गए हैं।
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फार-लेफ्ट पार्टी फ्रांस अनबाउंड पहले ही विश्वास मत का प्रस्ताव पेश करने की घोषणा कर चुकी है, जो कम्युनिस्ट और ग्रीन पार्टी के सांसदों का समर्थन पा सकती है। सोशलिस्ट पार्टी का वोट बायरू के भविष्य के लिए निर्णायक हो सकता है, क्योंकि वे सरकार से असहमत होने के बावजूद देश के हित में बजट पर काम करने के लिए तैयार हैं।