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Geopolitics: बोल्टन बोले- ग्रीनलैंड-वेनेजुएला से जुड़ी नीतियां चिंताजनक, ट्रंप को नोबेल की आस पर कही बड़ी बात

Tue, 06 Jan 2026 02:04 PM IST
लव गौर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अमेरिकी पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई से लेकर ग्रीनलैंड पर ट्रंप के हालिया बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ग्रीनलैंड पर सैन्य कार्रवाई को लेकर कहा कि यह विनाशकारी गलती होगी।
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पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन का बयान - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अमेरिका की वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई ने पूरी दुनिया सकते में है। निकोलस मादुरो को पकड़कर न्यूयॉर्क ले जाना और उनको न्यायिक दायर में लाने पर विश्व के अलग-अलग देशों की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। इसी के साथ ट्रंप की ग्रीनलैंड को लेकर की गई टिप्पणी से नया विवाद खड़ा हो गया है। इधर, अब अमेरिका और कोलंबिया के बीच तनाव बढ़ गया है। ऐसे में मौजूदा घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) जॉन बोल्टन की कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया सामने आई है।
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पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) जॉन बोल्टन ने कहा कि मुझे लगता है कि मादुरो के मामले में उम्मीद और वास्तविकता यह होनी चाहिए कि हम रूस, चीन और ईरान जैसे बाहरी देशों द्वारा उत्पन्न खतरों को क्यूबा के साथ तालमेल को समाप्त करने का प्रयास कर रहे हैं, जो एक और खतरा है। जिसे मादुरो शासन ने वेनेजुएला को एक ऑपरेटिंग बेस के तौर पर इस्तेमाल करने की इजाजत दी है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि वेनेजुएला के लोगों को इस सरकार ने बहुत लंबे समय से दबा रखा है। यही संदेश हमें देना चाहिए। स्पष्ट रूप से कहूं तो मुझे नहीं लगता कि ट्रंप यही कह रहे हैं, लेकिन मेरा मानना है कि यही असली वजह है कि मादुरो को हटाना और उम्मीद है कि बाकी सरकार को हटाना भी सही है।

अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन पर क्या बोले जॉन बोल्टन?
वेनेजुएला पर कार्रवाई को लेकर जॉन बोल्टन ने कहा कि मेरा मानना है कि हम अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरी तरह से पालन कर रहे थे। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में धांधली करके मादुरो के सत्ता पर कब्जे के जवाब में हमें वेनेजुएला के असली विपक्ष का समर्थन मिला, जिसकी पुष्टि वेनेजुएला और अंतरराष्ट्रीय दोनों ही तटस्थ पर्यवेक्षकों ने की है। मुझे लगता है कि इस पृष्ठभूमि को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई लोग दावा करते हैं कि यह रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण या चीन द्वारा ताइवान पर आक्रमण जैसी कार्रवाइयों के लिए एक मिसाल कायम करता है। ऐसा बिल्कुल नहीं है। हालांकि, समस्या यह है कि ट्रंप आखिरकार सरकार बदलने में कामयाब नहीं हुए। उन्होंने मादुरो को हटा दिया है, लेकिन तानाशाही सरकार अभी भी बनी हुई है। यह भ्रामक है, क्योंकि शनिवार को ट्रंप द्वारा दिए गए बयान में ऐसा प्रतीत हुआ कि वह मादुरो के न रहने पर शासन से निपटने के लिए तैयार हैं।
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जॉन बोल्टन ने आगे कहा कि रूस इस गोलार्ध में अपनी एक्टिविटीज के लिए वेनेजुएला को एक ऑपरेटिंग बेस के तौर पर इस्तेमाल करता है, जिसे वह क्यूबा से अधिक सुरक्षित मानता है, क्योंकि क्यूबा फ्लोरिडा से सिर्फ 90 मील दूर है, जबकि वेनेजुएला ज्यादा दूर है। क्यूबा, जो रूस के बहुत काम का है, सरकार को चलाने और उसे सत्ता में बनाए रखने के लिए सस्ते वेनेजुएला के तेल पर निर्भर है। रूस भी चाहता है कि यह जारी रहे। यह मंजूर नहीं है। चीन वेनेजुएला के तेल तक अधिक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल, वह वेनेजुएला के तेल एक्सपोर्ट का लगभग 80 फीसदी खरीदता है और शायद तेल इंफ्रास्ट्रक्चर में बहुत ज्यादा शामिल होने पर विचार करेगा, क्योंकि वेनेजुएला के तेल भंडार दुनिया में सबसे बड़े हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि अर्थव्यवस्था मजबूत है, जो किसी भी मौजूदा राष्ट्रपति के लिए अच्छी बात है, लेकिन मेरा मानना है कि उन्होंने दुनिया भर में अमेरिका के हितों को बहुत नुकसान पहुंचाया है। मुझे उम्मीद है कि उस नुकसान की भरपाई की जा सकती है, हालांकि अभी तीन साल बाकी हैं।

अमेरिकी संविधान बदलने के कयासों पर बयान
जॉन बोल्टन ने डोनाल्ड ट्रंप के तीसरे कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति बनने और इसके लिए अमेरिकी संविधान बदलने के विचार पर कहा,'मुझे लगता है कि ट्रंप ने मूल रूप से यह विचार छोड़ दिया है। मुझे नहीं लगता कि वह संविधान बदल सकते हैं, इसमें बहुत सारे कदम शामिल हैं। तीन साल में ऐसा करना संभव नहीं है। मुझे यह भी लगता है कि उन्होंने धीरे-धीरे और सार्वजनिक रूप से यह मान लिया है कि जेडी वेंस उनके उत्तराधिकारी होंगे।'

'असली लक्ष्य नोबेल शांति पुरस्कार है, लेकिन...'
अमेरिका समर्थित रूस-यूक्रेन शांति योजना पर कहा जॉन बोल्टन ने कहा कि मुझे लगता है कि रूसियों ने इस मामले में, खासकर यूक्रेन के बारे में ट्रंप को बहुत चतुराई से मात दी है और ऐसा लगता नहीं है कि वहां कोई ऐसा समझौता होगा जिसे यूक्रेनी लोग मान सकें। मेरा अनुमान है कि जैसा कि उन्होंने पिछले एक साल में कई बार किया है, ट्रंप अंततः रूस और यूक्रेन के बीच समझौता कराने के प्रयास से पीछे हट जाएंगे। उनका असली लक्ष्य नोबेल शांति पुरस्कार है, लेकिन रूस और यूक्रेन के बीच किसी समझौते के लिए उन्हें यह पुरस्कार इतनी जल्दी नहीं मिलने वाला है, क्योंकि दोनों पक्ष एक-दूसरे से बहुत दूर हैं।

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वेनेजुएला में निवेश करने से हिचकिचाएंगी कंपनियां
जॉन बोल्टन ने वेनेजुएला में अनिश्चितताओं के बीच अमेरिकी तेल कंपनियों के निवेश में हिचकिचाहट पर कहा कि मुझे लगता है कि यह एक कल्पना है। सच तो यह है कि वेनेजुएला में शावेज-मादुरो की लगभग 30 साल की तानाशाही के दौरान, उन्होंने देश के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर, तेल की पंपिंग, ट्रांसमिशन और लोडिंग को मैनेज किया है और इसे बहुत खराब कर दिया है। वेनेजुएला की निर्यात क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि हासिल करने के लिए, लंबी अवधि में अरबों डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी। यह कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे रोशनी की तरह चालू या बंद किया जा सके। परिणामस्वरूप वेनेजुएला में अत्यधिक अनिश्चित राजनीतिक स्थिति का सामना कर रही अमेरिकी और अन्य विदेशी तेल कंपनियां जब तक उन्हें और अधिक स्पष्टता नहीं मिल जाती, तब तक बड़े पूंजी निवेश करने में बहुत हिचकिचाएंगी।

वेनेजुएला के तेल सेक्टर में राष्ट्रपति ट्रंप की संभावित निवेश योजनाओं पर जॉन बोल्टन कहा, 'मुझे लगता है कि ट्रंप जो करते हैं, उससे कोई आम नतीजा निकालना गलती होगी, क्योंकि वह किसी पक्की सोच या नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रेटेजी के आधार पर काम नहीं करते हैं। उनका तरीका बहुत लेन-देन वाला है। इस मामले में वह मुख्य रूप से वेनेजुएला के तेल तक पहुंच बनाने में दिलचस्पी रखते हैं। यह बात साफ तौर पर कई दूसरी स्थितियों में लागू नहीं होती है। इसलिए इस शुरुआती स्टेज में, जब अभी बहुत कुछ पता नहीं है, तो मैं इस बारे में कोई बड़ा नतीजा निकालने में बहुत हिचकिचाऊंगा कि वह दूसरी जगहों पर क्या कर सकते हैं।'

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डोनाल्ड ट्रंप के नोबेल शांति पुरस्कार पर नजर रखने के बारे में उन्होंने कहा कि मुझे यकीन है कि अगर आप राष्ट्रपति ट्रंप को कुछ और दिन देंगे, तो वह समझा देंगे कि वेनेजुएला से मादुरो को हटाने पर उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार क्यों मिलना चाहिए, लेकिन मुझे लगता है कि ऐसा होना मुश्किल है।"
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ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप प्रशासन को किया आगाह
वहीं ट्रंप के ग्रीनलैंड को अपने देश में मिलाने पर विचार करने पर उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि अमेरिका में इसे ट्रोलिंग कहते हैं। ट्रंप का मोलभाव करने का तरीका यह है कि वह लोगों को चौंकाने के लिए कुछ अजीब बात कहते हैं, और फिर अगर उन्हें अपनी मांगी हुई चीज का 30 फीसदी भी मिल जाता है, तो वह खुश हो जाते हैं। मेरे लिए यह सोचना भी मुश्किल है कि वह ग्रीनलैंड के खिलाफ मिलिट्री फोर्स का इस्तेमाल करेंगे। अगर उन्होंने ऐसा किया, तो यह अमेरिका के लिए एक बहुत बड़ी गलती होगी। इसका मतलब NATO गठबंधन का खत्म होना भी हो सकता है। यह एक बड़ी तबाही होगी।

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इसी के साथ उन्होंने भारत पर टैरिफ लगाना दुर्भाग्यपूर्ण बताया।  जॉन बोल्टन ने कहा कि रूस से तेल खरीदने वाले भारत पर अतिरिक्त शुल्क लगाना, लेकिन चीन, तुर्किए या किसी अन्य देश पर नहीं दुर्भाग्यपूर्ण रहा है। मैं दोनों देशों के साथ घनिष्ठ संबंध बहाल होते देखना चाहता हूं, क्योंकि मेरा मानना है कि चीन की वर्चस्ववादी महत्वाकांक्षाओं को रोकने में हमारा साझा हित है।

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