नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ के बीजिंग द्वारा दिए गए ‘भारत-चीन प्लस’ फार्मूले को खारिज करने के बाद पारस्परिक लाभ पर आधारित भारत-नेपाल व चीन के बीच त्रिपक्षीय साझेदारी का समर्थन किया है। उन्होंने कहा, नेपाल एक संप्रभु और स्वतंत्र देश है इसलिए त्रिपक्षीय साझेदारी में नेपाल के पास समान दर्जा और अधिकार होना चाहिए।
प्रचंड ने यह भी कहा कि भारत व नेपाल के बीच सीमा विवाद का हल कूटनीतिक और राजनीतिक वार्ता के जरिये होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कालापानी और सुस्ता से जुड़े मुद्दे दोनों देशों के बीच काफी समय से लंबित हैं, और अब इन्हें वार्ता द्वारा हल करने का उपयुक्त समय है। प्रचंड ने कहा, नेपाल सरकार को कालापानी और लिम्पीधुरा पर अपने दावे के समर्थन में ऐतिहासिक दस्तावेज पेश करने चाहिए।