Pakistan: Imran Khan Long March
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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा पर ताजा हमले के जरिए ‘एस्टैबलिशमेंट’ पर निशाना साधा है। राजनीति विशेषज्ञों के मुताबिक खान की रणनीति ‘एस्टेब्लिशमेंट’ को दबाव में बनाए रखने की है। इसलिए उन्होंने बाजवा के बहाने सेना के सियासी हस्तक्षेप का मामला जिंदा रखने की कोशिश की है। पाकिस्तान में सेना और खुफिया तंत्र के नेतृत्व को ‘एस्टेब्लिशमेंट’ के नाम जाना जाता है।
इमरान खान को बाजवा पर निशाना साधने का ताजा मौका अपनी पार्टी- पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के सहयोगी दल पाकिस्तान मुस्लिम लीग (क्यू) के नेता परवेज इलाही के एक बयान से मिला। इलाही पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री भी हैं। इलाही इस वर्ष मार्च में पीटीआई के साथ आए थे, जब इसके सांसद दल-बदल कर रहे थे और कुछ अन्य सहयोगी दलों ने उसका साथ छोड़ दिया था। उसी घटनाक्रम के कारण इमरान खान की सरकार गिर गई थी।
इलाही के बेटे मुनीस इलाही ने पिछले दिनों बयान दिया कि उनके पिता ने जनरल बाजवा के कहने पर पीटीआई का साथ दिया था। परवेज इलाही ने रविवार को इस बयान की पुष्टि की। एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें पीटीआई और उसके विरोधी दोनों खेमों से ऑफर मिले थे। परवेज इलाही ने कहा- ‘आखिर पल में अल्लाह ने मेरा रास्ता बदल दिया और रास्ता दिखाने के लिए बाजवा साहेब को भेजा। जब मैंने उनसे कहा कि मैं शरीफ परिवार पर भरोसा नहीं करता, तो बाजवा साहेब ने कहा कि आपके लिए इमरान और उनके दोस्तों की तरफ जाने वाला रास्ता पकड़ना बेहतर होगा।’
इलाही का ये बयान आने के बाद इमरान खान ने एक दूसरे टीवी चैनल को इंटरव्यू दिया। उसमें उन्होंने कहा कि जनरल बाजवा उस समय दोहरा खेल खेल रहे थे। उन्होंने स्वीकार किया कि 2019 में जनरल बाजवा का कार्यकाल बढ़ा कर उन्होंने बड़ी गलती की थी। उन्होंने कहा- ‘जनरल बाजवा मुझसे जो भी कहते थे, मैं उस पर यकीन कर लेता था। मुझे लगता था कि हम दोनों के हित समान हैं- यानी देश की रक्षा। लेकिन मैं नहीं जानता था कि मुझसे झूठ बोला जा रहा है और मुझे धोखा दिया जा रहा है।’
कुछ टीकाकारों ने कहा है कि ये एक के बाद आए एक बयान का ये सारा घटनाक्रम नियोजित मालूम पड़ता है। यह एक रणनीति का हिस्सा है, जिसका मकसद सेना की साख पर चोट पहुंचाना है, ताकि आगे वह सियासत में दखल ना दे। समझा जाता है कि जनरल असीम मुनीर के सेनाध्यक्ष बनने के बाद इमरान खान परेशान हैं। इसलिए उन्होंने जनरल बाजवा को लांछित करने के बहाने जनरल मुनीर को ‘हद में रखने’ की चाल चली है। प्रधानमंत्री रहते हुए खान ने मुनीर को खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख पद से बर्खास्त कर दिया था।
संकेत हैं कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी इमरान खान की इस रणनीति से परिचित हैं। उन्होंने रविवार को इमरान खान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री सत्ता में लौटने के बेसब्री में लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इमरान खान ने संसदीय लोकतंत्र और देश के प्रमुख संस्थानों पर ही अब हमला बोल दिया है।