चीन के उपप्रधानमंत्री हे लिफेंग (He Lifeng) रविवार को महत्वाकांक्षी अरबों डॉलर की चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) परियोजना के 10 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित एक समारोह में भाग लेने के लिए यहां पहुंचे। लिफेंग चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो के सदस्य हैं। वह 30 जुलाई से एक अगस्त तक अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और राष्ट्रपति आरिफ अल्वी के साथ बैठक करेंगे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यहां पहुंचने पर गृह मंत्री राणा सनाउल्लाह और योजना मंत्री अहसान इकबाल ने उनका स्वागत किया।
इससे पहले शनिवार को विदेश कार्यालय (एफओ) द्वारा जारी एक बयान में कहा गया था कि चीनी उपप्रधानमंत्री पाक संघीय सरकार के निमंत्रण पर पाकिस्तान की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। उन्होंने चीन के अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों और बेल्ट एंड रोड पहल के कार्यान्वयन में प्रमुख भूमिका निभाई है, जिसमें से सीपीईसी एक प्रमुख परियोजना है। राष्ट्रीय विकास और सुधार आयोग के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने पाकिस्तान में सीपीईसी परियोजनाओं की कई योजना और कार्यान्वयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पाकिस्तान एफओ ने कहा कि उनकी यात्रा पाकिस्तान और चीन द्वारा अपनी "ऑल-वेदर स्ट्रैटेजिक कोऑपरेटिव पार्टनरशिप" को और गहरा करने के महत्व को दर्शाती है।यह एक-दूसरे के मूल हितों के मुद्दों पर समर्थन की भी पुष्टि करता है, आर्थिक और वित्तीय सहयोग बढ़ाता है, सीपीईसी के उच्च गुणवत्ता वाले विकास को आगे बढ़ाना और दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने के लिए नए रास्ते तलाशता है।
सीपीईसी 2013 से पूरे पाकिस्तान में निर्माणाधीन बुनियादी ढांचे और अन्य परियोजनाओं का एक संग्रह है। बीजिंग के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) का हिस्सा, प्रमुख कनेक्टिविटी और निवेश कॉरिडोर परियोजना के तहत इस्लामाबाद को अब तक विभिन्न परिवहन, ऊर्जा और बुनियादी ढांचा योजनाओं में प्रत्यक्ष चीनी निवेश में 25.4 अरब अमेरिकी डॉलर प्राप्त हुए हैं।
सीपीईसी पाकिस्तान के बलूचिस्तान में ग्वादर बंदरगाह को चीन के शिनजियांग प्रांत से जोड़ता है। हालांकि, भारत इसका विरोध कर रहा है क्योंकि यह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजर रहा है। बीआरआई को 2013 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य दक्षिण पूर्व एशिया, मध्य एशिया, खाड़ी क्षेत्र, अफ्रीका और यूरोप को भूमि और समुद्री मार्गों के नेटवर्क से जोड़ना है। बीआरआई को दुनियाभर में चीनी निवेश द्वारा वित्त पोषित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के साथ विदेशों में अपना प्रभाव बढ़ाने के चीन के प्रयास के रूप में देखा जाता है।